मोहाली जिला अदालत ने सोमवार को पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में दिल्ली की मंडोली जेल में उम्रकैद काट रहे बंद बब्बर खालसा इंटरनेशनल (बिकेआई) के प्रमुख जगतार सिंह हवारा को हथियार और विस्फोटकों से जुड़े एक मामले में बरी कर दिया गया है। साल-2020 में खरड़ में दर्ज इस मामले में जगतार सिंह हवारा को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये जिला अदालत में पेश किया गया था। हवारा पर आर्म्स एक्ट और एक्सप्लोसिव एक्ट के तहत आरोप लगाए गए थे।
हवारा के वकील जसपाल सिंह मंझपुर ने दावा किया है कि यह उनके खिलाफ दर्ज अंतिम लंबित मामला था, जिसमें बरी होने के बाद अब वह पैरोल का हकदार हो गया है। अगस्त 2023 में अदालत ने हवारा पर आईपीसी की धारा 120-बी, धारा 25 आर्म्स एक्ट और धारा 4 और 5 एक्सप्लोसिव एक्ट के तहत आरोप तय किए थे। वकील मंझपुर ने कहा कि यह मामला पूरी तरह से झूठा था और इसमें कोई दम नहीं था। पुलिस अदालत में अपना पक्ष साबित करने में नाकाम रही, इस कारण हवारा को अदालत ने बरी कर दिया गया है। इसके खिलाफ कुल 32 मामले दर्ज थे और यह अंतिम मामला था, जिसमें वह बरी हुए हैं। अब वह कानूनी रूप से पैरोल के योग्य है।
इससे पहले हवारा की शारीरिक रूप से कोर्ट में पेशी को टाल दिया गया था, क्योंकि मंडोली जेल के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) ने अदालत में जवाब दाखिल करते हुए कहा था कि हवारा एक उच्च जोखिम (हाई रिस्क) कैदी है और उसे शारीरिक रूप से अदालत में पेश करना संभव नहीं है।
आज भी हवारा को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोर्ट में पेश किया गया। अदालत ने जेल प्रशासन को उनके बरी होने की जानकारी दे दी है। वकील मंझपुर ने बताया कि हवारा के खिलाफ खरड़ में एक मामला दर्ज किया गया था, जिसमें दावा किया गया था कि जब्त किए गए हथियार और विस्फोटक हवारा की ओर से लाए गए थे। जनवरी-2024 में मोहाली के सोहाना थाने में दर्ज एक अन्य मामले में भी अदालत ने हवारा को आरोपों से डिस्चार्ज कर दिया था, क्योंकि अभियोजन पक्ष पर्याप्त साक्ष्य पेश नहीं कर पाया था। अदालत ने उन्हें विस्फोटक अधिनियम और साजिश के आरोपों से मुक्त कर दिया था।