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गांव झयूरहेड़ी के पंचायती फंडो में तीन करोड़ से ज्यादा का घपला आया सामने

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गांव झयूरहेड़ी के पंचायती फंडों में करोड़ों का घपला
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बीडीपीओर और पंचायत सचिवों की मिलीभगत से पंचायती फंडों में घोटाला
गांव के सरपंच समेत अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की सिफारिश
अमर उजाला ब्यूरो
मोहाली।
पंचायत विभाग की ओर से गांव झयूरहेड़ी के पंचायती फंडों में तीन करोड़ 62 लाख 61 हजार 763 रुपये का घपला सामने लाया गया है। इस बारे में विभाग के सचिव अनुराग वर्मा ने बताया कि गांव के पंचायती फंडों में हुई हेराफेरी की शिकायतें मिलने पर विभाग के मंत्री तृप्त रजिंदर सिंह बाजवा ने जांच के आदेश दिए थे।
वर्मा ने बताया कि गांव की पंचायत की ओर से करवाए गए कार्यों की जांच अधिकारियों की टीम बनाकर कराई गई, जांच अधिकारी ने कई अहम खुलासे किए हैं। जांच अधिकारी ने दी गई रिपोर्ट में लिखा है कि ब्लॉक खरड़ के पूर्व बीडीपीओ महिंदर सिंह, मलविंदर सिंह, जतिंदर सिंह ढिल्लों और पंचायत सचिव जसबीर सिंह व रविंदर सिंह ने गांव के सरपंच गुरपाल सिंह और अन्य पंचों के साथ मिलकर पंचायती फंडों में बड़े स्तर पर घपलेबाजी की।
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उन्होंने बताया कि इन अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से पंचायत द्वारा छह करोड़ 33 लाख 29 हजार 209 रुपये की राशि बिना मंजूरी के खर्च की गई है। जबकि जांच के दौरान करवाए गए कार्यों की असेस्मेंट दो करोड़ 70 लाख 67 हजार 446 रुपये बनती है। इसी तरह इसमें 3 करोड़ 62 लाख 61 हजार 763 रुपये की हेराफेरी की गई। जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि यह राशि संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और सरपंच ग्राम पंचायत झयूरहेड़ी से वसूलने योग्य है। साथ ही उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की सिफारिश भी की गई है।
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वर्मा ने बताया कि ग्राम पंचायत द्वारा अपने कार्यकाल के दौरान किए गए कार्यों के लिए एक करोड़, दो लाख 96 हजार 264 रुपये की राशि विभिन्न बैंकों से निकालकर मास्टर रोल के खिलाफ भुगतान किए। जांच के बाद कराए गए कार्यों पर 53 लाख 61 हजार 436 रुपये का खर्च बनता है। इसी तरह 49 लाख 36 हजार 826 रुपये की ज्यादा अदायगी की गई है। उन्होंने बताया कि पंचायत की ओर से विकास कार्यों के पर तीन करोड़ 76 लाख 26 हजार 779 रुपये की राशि इन कार्यों में इस्तेमाल किए गए सामान पर खर्च दिखाई गई है। लेकिन असल में जो विकास कार्य किए दिखाए गए हैं उन पर कुल दो करोड़ 8 लाख 30 हजार 87 रुपये के मटीरियल की खपत हुई। इसी तरह पंचायत द्वारा फर्जी बिल डाल कर एक करोड़ 67 लाख 96 हजार 692 रुपये की राशि खुर्द बुर्द की गई। साथ ही पंचायत द्वारा मिलीभगत करके अन्य कार्यों पर भी ज्यादा खर्च दिखाया गया है। जो की जांच के बाद सामने आया है।
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