मोहाली। फेज-3बी1 स्थित लिवर इंस्टीट्यूट में गंभीर मरीजों के बेहतर इलाज के लिए सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। संस्थान में जल्द ही एक और अत्याधुनिक कंटीन्युअस रीनल रिप्लेसमेंट थेरेपी (सीआरआरटी) मशीन स्थापित की जाएगी। अस्पताल में मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। संस्थान में पहले से ही एक सीआरआरटी मशीन है, लेकिन गंभीर रोगियों के बढ़ते दबाव के कारण अब दूसरी मशीन मंगवाई गई है।
यह जल्द ही इंस्टॉल हो जाएगी। लिवर की गंभीर बीमारियों में अक्सर किडनी फेल्योर का खतरा रहता है। यह कदम क्षेत्र की क्रिटिकल केयर सेवाओं को और अधिक मजबूत बनाएगा। भविष्य में जरूरत के अनुसार ऐसी और भी मशीनें मंगवाई जाएंगी ताकि किसी भी मरीज को इलाज के लिए इंतजार न करना पड़े। सीआरआरटी मशीन मुख्य रूप से आईसीयू में उन मरीजों के लिए जीवन रक्षक साबित होती है जिनकी स्थिति अत्यंत नाजुक होती है। सामान्य डायलिसिस की तुलना में इसके कई फायदे हैं।
यह है मामला
स्थिर उपचार : यह तकनीक 24 घंटे लगातार और धीमी गति से रक्त को साफ करती है। इससे मरीज के हृदय और ब्लड प्रेशर पर अचानक दबाव नहीं पड़ता।
एक्यूट किडनी इंजरी में कारगर : सेप्सिस, वेंटिलेटर पर मौजूद मरीजों और लिवर-किडनी की दोहरी मार झेल रहे रोगियों के लिए यह तकनीक वरदान है।
विषाक्त पदार्थों की निकासी : यह मशीन शरीर से अपशिष्ट और अतिरिक्त तरल को नियंत्रित गति से बाहर निकालकर मरीज की हालत स्थिर रखती है।
मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। इस वजह से इस मशीन की जरूरत काफी बढ़ गई है। हमारा लक्ष्य हर गंभीर मरीज को समय पर विश्वस्तरीय इलाज मुहैया कराना है। आने वाले समय में और भी मशीन मंगवाई जाएगी। -डॉ. वीरेंद्र सिंह, प्रोजेक्ट हेड