डेराबस्सी। कांग्रेस पार्टी ने दस साल बाद डेराबस्सी नगर काउंसिल में वापसी की है। कांग्रेस पार्टी ने कुल 19 में से 13 वार्डों में जीत हासिल की है। दस सालों से काउंसिल पर राज कर रही अकाली दल को सिर्फ तीन सीटों पर ही सब्र करना पड़ा है। भाजपा को एक सीट मिली है। यह सीट भाजपा के राज्य कार्यकारिणी कमेटी के सदस्य मुकेश गांधी को निजी वार्ड नंबर-12 से मिली है। इसमें पार्टी का उम्मीदवार अमित वर्मा को जीत हासिल हुई है। शहर में से दो आजाद उम्मीदवार वार्ड नंबर-9 से आशा शर्मा और वार्ड नंबर-13 से आशु उपनेजा विजेता रहे हैं। इन दोनों उम्मीदवारों में आशा शर्मा कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने के कारण आजाद तौर पर खड़ी थी। वहीं आशु उपनेजा किसानों के विरोध को देखकर मौके पर भाजपा से आजाद उम्मीदवार के तौर पर खड़ी हुई थी। उम्मीदवारों में आम आदमी पार्टी खाता खोलने में नाकाम रही और इस पार्टी के ज्यादातर उम्मीदवार अपनी जमानत भी बचाने में नाकाम रहे।
अकाली दल के दो पूर्व प्रधानों को मिली करारी हार
अकाली दल की तरफ से नगर काउंसिल के दो पूर्व प्रधान वार्ड नंबर-10 से भूपिंद्र सिंह सैनी और वार्ड नंबर-14 से हरजिंद्र सिंह रंगी को बड़ी हार का सामना करना पड़ा। बीते चुनावों के दौरान अकाली दल और भाजपा गठजोड़ ने शहर की सारी 19 सीटों पर जीत हासिल की थी। वार्ड नंबर एक से अकाली दल की उम्मीदवार जसविंद्र कौर को सिर्फ पांच वोट से जीत प्राप्त हुई है।
भाजपा को 14 में से एक पर मिली जीत
किसान संघर्ष के चलते भाजपा को डेराबस्सी में भारी विरोध का सामना करना पड़ा। भाजपा कुल 19 वार्डों पर उम्मीदवार खड़े करने में नाकाम रही। जो सिर्फ 14 उम्मीदवार ही खड़े कर पाई थी। जिनमें एक वार्ड पर जीत हासिल हुई है। यह वार्ड भाजपा के राज्य कार्यकारिणी सदस्य मुकेश गांधी का निजी वार्ड था। जो खुद यहां से चुनाव लड़ते थे। इस बार यह वार्ड बीसी के लिए आरक्षित हो गया था। इसके बाद मुकेश गांधी की तरफ से अमित वर्मा को मैदान में उतारा गया था।
ढाई घंटे में परिणाम आए सामने
ईवीएम में वोटों के परिणाम काफी जल्द सामने आए। सुबह आठ बजे मतगणना शुरू हो गई थी। साढ़े दस बजे सारे वार्डों के नतीजे सामने आ गए थे। चुनाव परिणामों के दौरान अकाली दल को मुबारिकपुर क्षेत्र के पहले चार वार्डों में दो पर जीत हासिल हुई। इसके बाद उनका एक ही उम्मीदवार वार्ड नंबर-18 में जीत पाया। इसके अलावा उनके सारे उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा। इस दौरान अकाली दल के खेमे में मायूसी छाई रही।