मोहाली। पंजाब की युवा सिटी मोहाली की इंडस्ट्री फर्स्ट जनरेशन के हाथों में है। उच्च शिक्षा प्राप्त ये फर्स्ट जनरेशन इंडस्ट्रियलिस्ट आत्मनिर्भर भारत के लिए चीन और यूरोपीय देशों से मुकाबले के लिए तैयार है। इन्हें अपनी क्षमता और कामगारों की मेहनत पर पूरा भरोसा है। इनका एक सवाल है कि मुकाबला होगा तो कैसे?
मोहाली के उद्योगपति कहते हैं कि सरकारी योजनाओं का लाभ चंद बड़े उद्योगपतियों को तो मिल रहा है, लेकिन एमएसएमई यानी माइक्रो, स्मॉल और मिडिल इंडस्ट्री के हिस्से में सिर्फ कागजी बातें और सियासी वादे ही आ रहे हैं। स्टार्टअप के लिए केंद्र सरकार के पैकेज में संभावनाएं हैं, लेकिन एक प्रचलित प्रोडक्ट का उत्पादन शुरू करने के लिए सरकारी योजनाओं में कोई सुविधा नहीं है, भले ही उस प्रोडक्ट की खपत का अधिकांश हिस्सा इंपोर्ट ही क्यों न होता हो। ऐसे में इंडस्ट्री में अपना करियर शुरू करने वाले युुवा आशाहीन होकर अपने कदम पीछे खींच लेते हैं। कोविड-19 के इस दौर में इंडस्ट्री के लिए सबसे ज्यादा मुश्किल टैक्सेशन सिस्टम व रेट ऑफ इंटरेस्ट ने पैदा की है। टैक्स रिबेट के लिए केंद्र व राज्य सरकारें एक-दूसरे के पाले में गेंद फेंककर अपना पल्ला झाड़ रही हैं, तो वहीं रेट ऑफ इंटरेस्ट को लेकर बैंकों की अलग-अलग पॉलिसी है। कोरोना काल से उबरने के लिए इंडस्ट्री को क्रेटिड लिमिट पर लोन की सुविधा तो केंद्र सरकार ने पैकेज में दी, लेकिन इस लोन का आधार हर बैंक अपने हिसाब से तय कर रहा है। इससे दुविधा की स्थिति है। वैसे भी इंडस्ट्रियलिस्ट व अर्थव्यवस्था के जानकार लोन देने को हल नहीं मानते हैं।
कोविड काल के बीच मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर का नारा आया। हर इंडस्ट्रियलिस्ट यह चाहता है कि ऐसा हो। विदेशों पर निर्भरता घटेगी तो सप्लाई चेन तेज होगी। देशी बाजार में ही कच्चा माल और तकनीक सहित अन्य चीजें उपलब्ध होंगी तो लागत घटेगी और उत्पादन व रोजगार बढ़ेगा। सवाल यह है कि यह होगा कैसे। कच्चा माल और तकनीक की सुविधा एक दम देशी बाजार में संभव नहीं है। बेहतर तकनीक व स्किल को देश में विकसित करने के लिए सरकार को डेवलपमेंट एंड रिसर्च पर योजनाबद्ध तरीके से खर्च करना होगा जिसका जमीनी स्तर पर लाभ मिल सके। तभी हम चरणबद्ध तरीके से 5 से 10 सालों के बीच आत्मनिर्भर देशी बाजार तैयार कर पाएंगे। - अनुराग अग्रवाल, पार्टनर, पीके इंडस्ट्री, मोहाली
कोरोना काल से उभरने के लिए केंद्र सरकार ने एमएसएमई के लिए बड़े पैकेज की घोषणा की, जिसका आंशिक लाभ ही मोहाली की इंडस्ट्री को मिल सका। राज्य सरकार की ओर से कोई राहत नहीं मिली। राज्य ने सिर्फ बिजली के फिक्स चार्ज की बात की, उसमें भी हैवी लोड इंडस्ट्री को बंदी के दौरान नुकसान उठाना पड़ा। पिछले हफ्ते बिजली के पीक लोड आवर लागू कर राज्य सरकार ने राहत देने की बजाय अतिरिक्त बोझ डाल दिया। अगर राज्य सरकार राहत देना चाहती तो जीएसटी के अपने हिस्से में छूट देकर कैश फ्लो बढ़ा सकती थी। इससे इंडस्ट्री ही नहीं बल्कि बाजार को भी फायदा होता। पैट्रोल डीजल के दाम घटाकर भी राज्य सरकार राहत दे सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। - हरि ओम वर्मा, रमानी प्रिसिजन मशीनज प्रा. लि. मोहाली
युवाओं के पलायन को रोकना है तो आत्मनिर्भर बनना ही होगा। इस दिशा में गंभीरता से कदम न उठाए गए तो देश में न टैलेंट बचेगा और न युवा। सरकार जो कुछ कर रही है, वो जमीनी स्तर पर कम और कागजों में ज्यादा है। सरकारी दफ्तरों का कामकाज आज भी पुरानी रिवायत से ही चल रहा है। वहां टेक्नोलॉजी सिर्फ नाम की है। केंद्र ने राहत पैकेज के नाम पर क्रेडिट लिमिट पर लोन देने की बात कही। हालांकि लोन देना स्थायी हल नहीं है, फिर भी अगर इंडस्ट्रियलिस्ट को लोन लेना हो तो उसका आधार क्या है यह साफ नहीं है। क्रेडिट लिमिट पर लोन के लिए हर बैंक अपने-अपने आधार तय कर रहा है। कोई सेल को, तो कोई प्रोडक्शन को तो कोई स्टॉक को आधार बना रहा है। सरकार इस पर स्पष्ट गाइडलाइन क्यों नहीं देती। - कमल कुमार दुप्पर, प्रोपराइटर, ओहरी इंडस्ट्री मोहाली
एक्सपर्ट व्यू
कोरोना काल ने एक बार फिर वैश्विक मंदी का दौर शुरू कर दिया है, जिसका असर लंबा होगा। सरकारें इसे गंभीरता से नहीं ले रही हैं खासकर राज्य सरकार। राज्य सरकार अगर जीएसटी के अपने हिस्से में छूट दे देती तो इससे बाजार में कैश फ्लो बढ़ता और उत्पादन भी। ईएमआई और कैश क्रेडिट पर ब्याज को बैंकों ने स्थगित किया इससे भी बोझ बढ़ा। अगर किसी को 60 किस्तें देनी थीं और उसने तीन किस्तें नहीं दी हैं तो अब उसे 63 किस्तें देनी होंगी। इससे 6 माह के अतिरिक्त ब्याज का बोझ उठाना होगा। बैंक तीन माह का ब्याज माफ कर सकते थे, लेकिन सरकार ने ऐसी गाइडलाइन नहीं बनाई। कैश क्रेडिट पर दिए जाने वाले लोन का आधार भी स्पष्ट नहीं है। अगर राज्य सरकार चाहती तो इस संकटकाल को अवसर में बदल सकती थी। पंजाब में आतंकवाद का दौर बीतने के बाद 1994 के आसपास तत्कालीन राज्य सरकार ने पैकेज देते हुए सेल टैक्स माफ किया था। इससे पंजाब की मौजूदा इंडस्ट्री को तो राहत मिली ही थी, बल्कि अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में इंडस्ट्री व निवेश पंजाब आया था। इसका लाभ राज्य की अर्थव्यवस्था को हुआ था। - एडवोकेट मुकेश घई, टैक्सेशन एक्सपर्ट, मोहाली