मोहाली। हाल ही में आई बाढ़ के कारण जिले के सभी स्कूल 27 अगस्त से बंद थे। अब स्थिति में सुधार को देखते हुए डीसी कोमल मित्तल ने सभी स्कूलों के प्रधानाचार्यों को निर्देश दिए हैं कि वे 8 सितंबर से शिक्षकों और कर्मचारियों को बुलाकर स्कूलों की सफाई, फॉगिंग और अन्य जरूरी काम पूरा करवा लें। प्रधानाचार्यों को यह भी कहा गया है कि वे अपने भवनों का निरीक्षण करें और यदि किसी भी संरचना में कोई कमी या असुरक्षा पाई जाती है, तो तुरंत प्रशासन को सूचित करें।
इस प्रक्रिया के तहत संबंधित विभाग सुरक्षा निरीक्षण करेगा और सुनिश्चित करेगा कि छात्रों और कर्मचारियों के लिए भवन सुरक्षित हैं। जिन स्कूल भवनों की स्थिति अच्छी मिलेगी, वहां 9 सितंबर से कक्षाएं सामान्य रूप से फिर से शुरू की जाएंगी। स्कूलों को यह भी निर्देश हैं कि सफाई और तैयारी के दौरान स्थानीय सरकारी निकायों और पंचायतों का सहयोग लें, ताकि सभी जरूरी कार्य समय पर पूरे हो सकें। जिला प्रशासन का कहना है कि बाढ़ के बाद स्कूलों की स्थिति को देखते हुए यह कदम विद्यार्थियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए आवश्यक था। इस प्रक्रिया में फॉगिंग और कीटाणुनाशक उपाय भी शामिल किए जाएंगे, ताकि बच्चों को सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण में शिक्षा प्राप्त हो सके।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत कार्य तेज करने के निर्देश
प्रशासन ने जल निकासी, सड़क मरम्मत और प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। रविवार को डीसी कोमल मित्तल ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि राहत कार्यों में ढिलाई नहीं बरती जाए और हर जरूरी कदम प्राथमिकता के आधार पर उठाए जाए। डेराबस्सी क्षेत्र में घग्गर नदी पर बना मुबारकपुर काॅजवे बाढ़ के चलते कई दिनों से अवरुद्ध पड़ा था। यह कॉजवे जीरकपुर और आसपास के क्षेत्रों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। यहां रविवार को नगर परिषद की टीमें बड़ी संख्या में जुटी रहीं। एक तरफ जहां नदी से मलबा और गाद हटाने का काम जारी रहा, वहीं दूसरी तरफ कॉजवे तक पहुंचने वाली टूटी-फूटी सड़कों को भी दुरुस्त किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सफाई का काम तेजी से हो रहा है, लेकिन अभी भी पूरी तरह से यातायात खोलने में कुछ समय लगेगा।
गांवों से पानी की निकासी
भगत माजरा और पलहेड़ी के बीच पानी जमा होने से खेत और रास्ते प्रभावित थे। यहां मोटर पंप और अन्य मशीनरी लगाकर लगातार पानी निकाला जा रहा है। प्रशासन ने अतिरिक्त कर्मचारियों को भी तैनात किया है ताकि राहत कार्य तेजी से हो सके। ग्रामीणों का कहना है कि अब धीरे-धीरे खेतों से पानी निकल रहा है, लेकिन फसलों को भारी नुकसान हुआ है। डीसी ने स्पष्ट किया कि जिले में सड़क संपर्क को जल्दी से जल्दी बहाल करना प्रशासन की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। कई जगहों पर सड़कों पर गड्ढे हो गए हैं और किनारे कट गए हैं। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि छोटे-मोटे मरम्मत कार्य तुरंत पूरे किए जाएं ताकि वाहनों की आवाजाही में दिक्कत न हो।
नुकसान का आकलन और मुआवजा
प्रशासन ने बाढ़ से प्रभावित फसलों, पशुओं और मकानों का सर्वे शुरू कर दिया है। प्राथमिक रिपोर्ट में पता चला है कि खेतों में खड़ी धान की फसल और सब्जियां बुरी तरह से खराब हुई हैं। कई जगहों पर पशुधन के नुकसान की भी खबर है। डीसी ने कहा कि जैसे ही सर्वे पूरा होगा, प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिया जाएगा।