जीरकपुर। लोंगोवाल में स्कूली वाहन में जिंदा जलकर हुई बच्चों की मौत का दर्द अभी कम भी नहीं हुआ है। परंतु कुछ दिन की प्रशासन की दिखावे की कार्रवाई के बाद अब दोबारा निजी वाहनों में बच्चों को ढोना बदस्तूर जारी हो गया है। क्षेत्र में बच्चों की सुरक्षा के बड़े दावे करने वाले निजी स्कूलों द्वारा उड़ाई जा रही नियमों की धज्जियां हर रोज छुट्टी के वक्त देखी जा सकती हैं। कम जगह पर जानवरों की तरह बच्चों को ठूंसकर बैठाए जाने के बाद सड़कों पर रफ्तार भरते इन छोटे निजी वाहनों के प्रति न तो अभिभावक ही सतर्क हैं और न ही जिम्मेदार।
जिम्मेदारों का हाल यह है कि लोंगोवाल घटना के बाद 2 दिन कार्रवाई कर अब फिर बदस्तूर नियम हवा में उड़ा रहे निजी वाहन चालकों की धरपकड़ के लिए अभियान ही नहीं चलाया जा रहा। वहीं, स्कूलों की बात की जाए तो दावा आधुनिक पढ़ाई और हाइटेक सुरक्षा का होता है लेकिन हकीकत में स्कूल निजी वाहनों में बच्चों को ढोया जा रहा है। सड़कों पर दर्जनों वाहन ऐसे भी हैं जिन्हें मानकों के विपरीत एलपीजी गैस सिलेंडर से दौड़ाया जा रहा है।
स्कूली वाहनों के नियम
- वाहन पर बच्चों के नाम की सूची, पता, कक्षा और ब्लड ग्रुप तथा रूट चार्ट अनिवार्य है।
-आग से निपटने के लिए अग्निशमन यंत्र होना जरूरी।
- वाहनों में स्पीड गवर्नर जरूरी।
- चालकों का वेरीफिकेशन व पांच साल का अनुभव अनिवार्य।
-वाहन की खिड़की पर लोहे की तीन रॉड और जाली लगी होनी चाहिए।
-वाहन का रंग पीला और उस पर स्कूल वाहन लिखा होना चाहिए।