मोहाली। शहर के एक प्राइवेट अस्पताल में जन्म के 10 दिन बाद एक बच्चे की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। बच्चे के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उन लोगों ने उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। दूसरी तरफ डॉक्टर ने इस मामले को हाइपरटेंशन वाला बताया है। बच्चे के पिता का कहना है कि बच्चा पहले ही मर चुका था, रुपये बटोरने के लिए उनको धोखे में रखा गया।
प्रेस कांफ्रेंस कर श्री फतेहगढ़ साहिब निवासी बच्चे के पिता इंदरप्रीत का कहना है कि उसका परिवार गरीब है। वह जमीन ठेके पर लेकर परिवार का गुजारा करता है। उसने बताया कि उसकी पत्नी संदीप कौर ने 22 जून को शैली अस्पताल सरहिंद में ऑपरेशन से एक लड़के को जन्म दिया।डिलीवरी के बाद जच्चा-बच्चा की तंदरुस्ती की पुष्टि डॉ. जीके शैली, डॉ. सीमा शैली और डॉ. जेडी शैली ने की। उन्होंने कहा कि करीब एक घंटे बाद ही उपरोक्त डॉक्टरों की टीम ने बच्चे की सेहत बिगड़ने का हवाला देकर उसको तुरंत मोहाली के एक प्राइवेट अस्पताल को रेफर कर दिया। परिवार ने सेक्टर-32 या पीजीआई रेफर करने की मांग की। उनकी बात न मानकर अकेले बच्चे को एंबुलेंस से मोहाली के एक निजी भेज दिया। बच्चे के माता-पिता को भी एंबुलेंस में नहीं बैठने दिया। आरोप है कि बच्चे की हालत चिंताजनक बताकर उनसे रुपये जमा करवाते रहे। डॉक्टरों ने 1 जुलाई तक बच्चे की सेहत तंदरुस्त बताई। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों ने बच्चे से मिलने भी नहीं दिया। इसके बाद अचानक फोन आया कि अपना बिल तुरंत क्लियर करें ताकि बच्चे को महंगी दवाई दी जा सके।
बच्चा वेंटिलेटर पर रखा हुआ था। इसके बाद दो जुलाई की सुबह चार बजे बच्चे को मृत घाेषित कर दिया गया। इसके बाद तुरंत साढ़े तीन लाख रुपये जमा कराने को कहा। इंदरप्रीत सिंह का कहना है कि बच्चा पहले ही मर चुका था, रुपये बटोरने के लिए उनको धोखे में रखा गया। मामले में शैली अस्पताल की डॉ. जीके शैली का कहना है कि वे कमीशन लेकर काम नहीं करतीं। जन्म के समय बच्चा स्वस्थ था लेकिन बाद में बच्चे को सांस लेने में दिक्कत होने के कारण माता-पिता ने बच्चे को निजी अस्पताल मोहाली भेजा। जहां मां को हाइपरटेंशन होने के कारण बच्चा भी जन्म के बाद हाइपरटेंशन में था। इस कारण उसके फेफड़ों में खून बहने लगा। कुछ समय बाद उकी मौत हो गई। इस मामले में मोहाली निजी अस्पताल के डॉक्टर बात करने से बचते रहे।