मोहाली। कांग्रेस नेता और राज्य के पूर्व वन मंत्री साधु सिंह धर्मसोत के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के मामले में आरोप तय हो चुके हैं। अब पूर्व मंत्री धर्मसोत मुकदमे का सामना करेंगे।
पूर्व मंत्री धर्मसोत को पिछले साल 15 जनवरी को जालंधर से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गिरफ्तार किया था। ईडी ने आरोप लगाया था कि 2017 से 2022 तक कांग्रेस शासन के दौरान वन मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान धर्मसोत ने करोड़ों रुपये के फंड को डायवर्ट किया। अदालत ने कहा कि आरोपी के खिलाफ प्रथम दृष्टया धारा 3 के तहत अपराध बनता है, जो धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 4 के तहत दंडनीय है।
ईडी के विशेष लोक अभियोजक जगजीत सिंह सराओ ने कहा कि अपराध की आय का उपयोग करके 6.83 करोड़ की संपत्ति बनाई गई थी, क्योंकि आरोपी ने कभी भी धन के स्रोतों के बारे में नहीं बताया। आरोपी के वरिष्ठ अधिवक्ता एपीएस देओल ने अधिवक्ता अरुण कौंडल की सहायता से कहा कि अनुसूचित अपराध मामले में संज्ञान लिया जाना अभी बाकी है, इसलिए पीएमएलए के तहत आरोप तय नहीं किए जा सकते। ईडी ने कहा था कि उसकी जांच में पाया गया कि धर्मसोत ने अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग किया और पंजाब के वन मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान विभिन्न अधिकारियों और निजी व्यक्तियों से रिश्वत प्राप्त की।
धर्मसोत पर पेड़ों को काटने, अधिकारियों के तबादले, खरीद करने और पेट्रोल पंप और होटल खोलने के लिए विभिन्न संस्थाओं/व्यक्तियों को अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने के लिए रिश्वत लेने का आरोप लगा था।
ईडी ने अदालत को बताया कि धर्मसोत ने अपने ओएसडी के माध्यम से प्रभागीय वन अधिकारी के तबादले के लिए 10-20 लाख, रेंजर के लिए 5-8 लाख, ब्लॉक अधिकारी के लिए 25 लाख और वन रक्षक के लिए 2-3 लाख रुपये रिश्वत के रूप में प्राप्त किए।