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Mohali News: मनरेगा कानून में बदलाव से नरेगा कर्मचारियों का भविष्य संकट में, नियमितीकरण की मांग को लेकर आंदोलन तेज

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मोहाली। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम मनरेगा-2005 के स्थान पर विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) लाए जाने के फैसले के खिलाफ पंजाब में नरेगा कर्मचारियों में भारी रोष है। नरेगा मुलाजिम एक्शन कमेटी पंजाब ने इस बदलाव को मजदूरों और कर्मचारियों दोनों के भविष्य के लिए खतरनाक बताया है। यूनियन के अनुसार, नए बिल के लागू होने से जहां राज्य सरकारों पर 40 प्रतिशत हिस्सेदारी का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, वहीं 16–18 वर्षों से मनरेगा को जमीनी स्तर पर लागू कर रहे पंजाब के लगभग 2100 नरेगा कर्मचारियों का भविष्य अधर में लटक गया है। कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी सेवाओं के नियमितीकरण की मांग कर रहे हैं, लेकिन हर सरकार ने उन्हें केवल आश्वासन ही दिए। नरेगा कर्मचारियों ने दावा किया है कि 15–18 वर्षों में गांवों के करीब 80 प्रतिशत विकास कार्य उनके माध्यम से पूरे हुए हैं। तालाबों का नवीनीकरण, गलियां-नालियां, खेल मैदान, पार्क, स्कूलों की चारदीवारी, आंगनबाड़ी केंद्र, नरेगा भवन, बायोगैस प्लांट, लाइब्रेरी, मिनी जंगल और ग्रामीण सड़कों जैसे अनेक कार्य मनरेगा के तहत हुए हैं। इसके अलावा चुनाव ड्यूटी, कोरोना काल में आपात सेवाएं, पराली जलाने पर रोक और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसे अतिरिक्त कार्य भी नरेगा कर्मचारियों ने निभाए। नरेगा मुलाजिम एक्शन कमेटी पंजाब के कन्वीनर अमृतपाल सिंह ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने सत्ता में आने से पहले नरेगा कर्मचारियों को नियमित करने का वादा किया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारियों को महीनों तक वेतन नहीं मिल रहा और फिलहाल तीन महीने का वेतन बकाया है।
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