मोहाली। पंजाब में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को पढ़ाने वाले विशेष शिक्षक 127 दिनों से न्याय की गुहार लगा रहे हैं। 18 से 20 वर्षों तक लगातार सेवाएं देने के बावजूद नियमितीकरण न होने से आहत इन शिक्षकों ने अब राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित नई भर्ती पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्पेशल एजुकेटर्स यूनियन (आईईआरटी, डीएसई, डीएसईटी) के नेतृत्व में चल रहा आंदोलन रविवार को और तेज हो गया। विशेष शिक्षकों का कहना है कि सरकार एक जनवरी 2026 से नियमित पदों पर नई भर्ती की तैयारी कर रही है, जबकि वर्षों से सेवा दे रहे अनुभवी शिक्षक आज भी अनुबंध पर काम करने को मजबूर हैं। उनका आरोप है कि नई भर्ती होने पर अनुभवहीन शिक्षक उनसे वरिष्ठ हो जाएंगे, जिससे न केवल उनका मनोबल टूटेगा बल्कि विशेष बच्चों की शिक्षा पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा। यूनियन के अनुसार, अधिकांश शिक्षक अब 45 से 55 वर्ष की आयु के हैं और सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच चुके हैं। ऐसे में नियमितीकरण की प्रक्रिया में देरी उनके भविष्य और परिवार की आर्थिक सुरक्षा पर भी सवाल खड़े कर रही है। शिक्षकों का कहना है कि उन्होंने अपनी पूरी कार्य-आयु विशेष बच्चों की सेवा में लगा दी, लेकिन सरकार अब उन्हें नजरअंदाज कर रही है। आंदोलन के तहत कुछ शिक्षक शिक्षा विभाग की ऊपरी मंजिलों पर डटे हुए हैं और लिखित आश्वासन मिलने तक पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। यूनियन नेताओं का कहना है कि बीते वर्षों में कैबिनेट सब-कमेटी के साथ कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला, ठोस फैसला नहीं हुआ। विशेष शिक्षकों ने यह भी आरोप लगाया कि विभाग की नीतियों में स्पष्टता का अभाव है। एक तरफ उन्हें शिक्षक माना जाता है, दूसरी तरफ नियमितीकरण के समय गैर-शिक्षक बताकर उनके अधिकारों से वंचित किया जाता है। अन्य शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को पहले ही नियमित किया जा चुका है। शिक्षकों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को राज्यव्यापी स्तर पर और उग्र किया जाएगा। विशेष शिक्षकों ने साफ किया कि वे नई भर्ती के विरोध में नहीं हैं, लेकिन उनका मानना है कि पहले वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों को नियमित कर न्याय किया जाना चाहिए।