चंडीगढ़। शहर के मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर, डिप्टी मेयर और पार्षदों की शक्ति बढ़ाने के लिए पहली बार चंडीगढ़ का अपना म्युनिसिपल एक्ट बनाने को लेकर नगर निगम ने प्रस्ताव पास किया है। मंगलवार को हुई 330वीं सदन की बैठक में मेयर-इन-काउंसिल बनाने की मांग का प्रस्ताव भी पास हो गया। मेयर अनूप गुप्ता ने कहा कि 30 साल हो चुके हैं। चंडीगढ़ का अपना एक्ट होना चाहिए, ताकि जनप्रतिनिधियों के पास पर्याप्त शक्तियां हों। सदन की बैठक में चार मुख्य एजेंडे, 16 सप्लीमेंट्री एजेंडें और चार टेबल एजेंडा पास किए गए। मेयर-इन-काउंसिल बनाने और चंडीगढ़ का अपना म्युनिसिपल कारपोरेशन एक्ट होने का एजेंडा, टेबल एजेंडा के रूप में पार्षद महेशइंदर सिंह सिद्धू लेकर आए। एजेंडा पर चर्चा नहीं हुई लेकिन किसी पार्षद ने विरोध भी नहीं किया और इसे जल्दबाजी में पास कर दिया गया। ऐसा करके नगर निगम की तरफ से एक बड़ा संदेश देने की कोशिश की गई है। एजेंडे में लिखा गया है कि शहर में सांसद के बाद पार्षद ही हैं, जो जनता की ओर से चुनकर भेजे गए हैं। शहर में मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर, डिप्टी मेयर व पार्षद हैं लेकिन फिर भी अधिकतर फैसले अधिकारियों की ओर से लिए जाते हैं। जनप्रतिनिधियों की शक्ति बढ़ाने के लिए शहर को मेयर-इन-काउंसिल की जरूरत है। एजेंडे में यहां तक कहा गया है कि चंडीगढ़ का अपना म्युनिसिपल कारपोरेशन एक्ट होना चाहिए, न कि एक्सटेंडेड एक्ट। बता दें कि चंडीगढ़ अभी भी पंजाब नगर निगम कानून (चंडीगढ़ तक विस्तार) अधिनियम को फॉलो करता है। मेयर अनूप गुप्ता का कहना है कि अब समय आ गया है कि चंडीगढ़ का अपना एक्ट होना चाहिए।
बिना चर्चा चार टेबल एजेंडा पास, सीनियर डिप्टी मेयर नजर आए खफा
सप्लीमेंट्री एजेंडा के बाद जब टेबल एजेंडा का नंबर आया तो सीनियर डिप्टी मेयर कंवरजीत सिंह राणा व अन्य कई पार्षदों ने कहा कि इन पर लंच के बाद चर्चा की जानी चाहिए लेकिन मेयर ने कहा कि 10 मिनट रुक जाते हैं और इन्हें भी पूरा कर लेते हैं। मेयर ने सचिव को टेबल एजेंडा पढ़ने के निर्देश दे दिए। इस पर कई पार्षद खड़े हो गए। कुछ पार्षद लंच के लिए चले गए और सीनियर डिप्टी मेयर ने यहां तक कह दिया कि ऐसी कौन सी आफत आ गई है। हालांकि, मेयर नहीं रुके तो उन्होंने कहा कि उनकी तरफ से सभी एजेंडे पास हैं। इसके बाद वह सदन से चले गए। कई अन्य पार्षद भी निकल गए। हालांकि, अगले कुछ सेकेंड में चारों टेबल एजेंडा को भी पास कर दिया गया।
हिंदी और पंजाबी को राजकीय भाषा बनाने का एजेंडा पास
पार्षद महेशइंदर सिंह सिद्धू की तरफ से एक अन्य टेबल एजेंडा लाया गया, जिसमें हिंदी और पंजाबी को चंडीगढ़ का राजकीय भाषा बनाने का प्रस्ताव था। इसे भी बिना चर्चा के जल्दबाजी में पास कर दिया गया। एजेंडा में लिखा गया है कि चंडीगढ़ की राजकीय भाषा अंग्रेजी है। देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। शहरवासियों की इच्छा है कि चंडीगढ़ की राजकीय भाषा हिंदी और पंजाबी होनी चाहिए। साथ ही नगर निगम की राजकीय भाषा भी हिंदी और पंजाबी होनी चाहिए। यह प्रस्ताव रखा गया, जिसे पास कर दिया गया।
2014 में भी पार्षदों ने किया था अध्ययन
शहर के पूर्व मेयर अरुण सूद ने कहा कि वर्ष 2014 में पार्षद मेयर-इन-काउंसिल व्यवस्था का अध्ययन करने के लिए कोलकाता गए थे। सभी ने पूरी व्यवस्था को देखा था और वहां का एक्ट लेकर आए थे। निगम में रिपोर्ट प्रस्तुत की गई और विस्तार से चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि अच्छी बात है सदन ने अपनी भावनाएं प्रस्तुत की हैं लेकिन इस संबंध में फैसला संसद की ओर से ही हो सकता है।
क्या है मेयर-इन-काउंसिल
कोलकाता में मेयर-इन-काउंसिल है। इस व्यवस्था में शहर में मेयर, मिनी मुख्यमंत्री की तरह कार्य करता है। जिस तरह से कैबिनेट मंत्री होते हैं, वैसे ही कुछ पार्षदों को काउंसिल में शामिल किया जाता है। इन्हें पानी, पार्क, सड़क आदि की जिम्मेदारी दी जाती है। मेयर-इन-काउंसिल में मेयर के पास वित्तीय शक्ति होती है और उसे लागू कराने की भी शक्ति होती है, जिसकी वजह से वह खुद आदेश जारी कर टेंडर आदि कॉल कर सकता है। हालांकि, चंडीगढ़ अपने स्तर पर इसे लागू नहीं कर सकता। यह संसद और केंद्र सरकार की ओर से ही होगा।