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Mohali News: सीबीसी मशीन खराब, मरीजों को निजी लैब के लगाने पड़ रहे चक्कर

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मोहाली। फेज-6 स्थित सिविल अस्पताल में मरीजों को इन दिनों खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में खून की सबसे महत्वपूर्ण जांचों में से एक, सीबीसी टेस्ट करने वाली मशीन पांच दिन से खराब पड़ी है। तकनीकी खराबी के कारण अस्पताल आने वाले गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों को अपनी जरूरी जांच करवाने के लिए निजी लैब का सहारा लेना पड़ रहा है।
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जानकारी के अनुसार, मशीन खराब होने के बाद मरीजों की जांच प्रभावित न हो, इसके लिए अस्पताल प्रबंधन ने अस्थायी रूप से एक निजी लैब से टाई-अप किया है। सोमवार को ही अकेले एक दिन में इस निजी लैब से दोपहर एक बजे तक 82 मरीजों ने सीबीसी टेस्ट करवाए। यह संख्या स्पष्ट करती है कि अस्पताल में प्रतिदिन सीबीसी टेस्ट की कितनी बड़ी मांग है। सिविल अस्पताल में गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए खून की यह जांच पूरी तरह से मुफ्त की जाती है। हालांकि, मशीन खराब होने के कारण मरीजों को मजबूरन बाहरी लैब को 80 रुपये प्रति टेस्ट का शुल्क चुकाना पड़ रहा है।



खराब मशीन ठीक करवाएं
डॉक्टर ने टेस्ट लिखा है, लेकिन पता चला कि मशीन खराब है। बाहर से 80 रुपये देने पड़ेंगे। मैं मुफ्त जांच के लिए ही सरकारी अस्पताल आया था। अगर मशीन पांच दिन से खराब है, तो अस्पताल को तुरंत इसे ठीक करवाना चाहिए। - श्याम कुमार
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टाइम बर्बाद हो रहा है
मुझे आंखों के ऑपरेशन से पहले सीबीसी समेत कुछ टेस्ट करवाने थे। अब मशीन खराब होने की वजह से हमें निजी लैब भेजा जा रहा है। हम सुबह से लाइन में लगे हैं, पहले ओपीडी की लाइन और अब टेस्ट की। पैसे से ज्यादा दिक्कत समय की बर्बादी है। सरकारी अस्पताल में आकर भी अगर निजी लैब के चक्कर लगाने पड़ें, तो क्या फायदा? - कश्मीरो देवी



वरिष्ठों की परेशानी समझें
मेरी उम्र 70 साल है। इस उम्र में थोड़ी-थोड़ी दूरी तय करना भी मुश्किल होता है। डॉक्टर ने कहा कि टेस्ट जरूरी है, लेकिन अब यहां 40 नंबर कमरे पर आकर पता चला कि मशीन खराब है। बाहर से टेस्ट करवा लो। प्रशासन को वरिष्ठ नागरिकों और बीमार लोगों की परेशानी को समझते हुए मशीन को प्राथमिकता के आधार पर ठीक करवाना चाहिए। -गुरप्रीत कौर

आधिकारिक कोट
हमें सीबीसी मशीन के खराब होने की जानकारी है। इस कारण मरीजों को हो रही असुविधा के लिए हमें खेद है। इंजीनियरों को बुलाया है और उम्मीद है कि मंगलवार तक यह मशीन पूरी तरह से ठीक होकर काम करना शुरू कर देगी। तब तक मरीजों की जांच प्रभावित न हो, इसके लिए स्थायी तौर पर क्रिस्ना लैब से टाई-अप किया है, ताकि कोई भी मरीज बिना जांच के न लौटे। - डॉ. एचएस चीमा, एसएमओ
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