मोहाली के फेज-3बी1 में 19 मार्च 2017 को बीएमडब्ल्यू कार की पिछली सीट में सूटकेश में एकम का शव बरामद हुआ था। पुलिस को एक ऑटो वाले ने इसकी सूचना दी थी। अब इस मामले में उसकी पत्नी सीरत को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है।
मोहाली अदालत ने नौ साल पुराने बिजनेसमैन एकम सिंह ढिल्लों हत्याकांड में फैसला सुनाया है। अदालत ने एकम की पत्नी सीरत कौर ढिल्लों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। सीरत कौर पर कुल 90 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
यह सनसनीखेज मामला 19 मार्च, 2017 को एकम सिंह की गोली मारकर हत्या से जुड़ा है। 37 वर्षीय एकम सिंह ढिल्लों की मोहाली के फेज-3बी1 स्थित उनके घर में गोली मारकर हत्या की गई थी।
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एकम हत्याकांड
- फोटो : फाइल
अदालत ने सीरत कौर को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत हत्या का दोषी पाया। उसे उम्रकैद के साथ 50 हजार रुपये का जुर्माना देना होगा। इसके अतिरिक्त, उसे धारा 201 के तहत सबूत मिटाने का दोषी ठहराया गया। इस आरोप में तीन साल की सजा और 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। आर्म्स एक्ट की धारा 25 के तहत भी उसे दोषी पाया गया। इस धारा के तहत तीन साल की सजा और 20 हजार रुपये का अतिरिक्त जुर्माना लगाया गया है। सीरत मार्च 2017 से ही न्यायिक हिरासत में है।
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एकम हत्याकांड
- फोटो : फाइल
हत्या के बाद उसे गिरफ्तार किया गया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, सीरत ने एक अन्य व्यक्ति के साथ अपनी दोस्ती को लेकर हुए घरेलू झगड़े के बाद यह कदम उठाया। उसने लाइसेंसी 9 एमएम पिस्टल से अपने पति के सिर में गोली मारी थी।
जांच में सामने आया कि घटना के तुरंत बाद सीरत कौर ने नया मोबाइल खरीदा था। उसने जांच के दौरान पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट कराने से भी इन्कार कर दिया था। अदालत ने सभी साक्ष्यों और गवाहों का गहन परीक्षण करने के बाद यह फैसला सुनाया। इस हाई-प्रोफाइल मर्डर केस में न्याय मिलने में आठ साल का लंबा समय लगा। यह फैसला कानून के दायरे से कोई बच नहीं सकता, इस संदेश को पुष्ट करता है।
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माैके पर जांच करते पुलिसकर्मी
- फोटो : फाइल
हत्या और सबूत मिटाने का प्रयास
हत्या के बाद सीरत ने शव को ठिकाने लगाने की कोशिश की। उसने एकम के शव को एक बड़े सूटकेस में भरकर छिपाया। अगले दिन सीरत ने सूटकेस को अपनी बीएमडब्ल्यू कार की डिकी में रखने के लिए एक ऑटो-रिक्शा ड्राइवर को बुलाया। सीरत की यह योजना तब नाकाम हो गई जब ऑटो-रिक्शा ड्राइवर तुल बहादुर ने सूटकेस से खून रिसते देखा।
शक होने पर तुल बहादुर तुरंत मौके से चला गया। उसने तत्काल पुलिस को इस संदिग्ध घटना की सूचना दी। पुलिस तुरंत एकम सिंह के घर पहुंची। पुलिस ने घर से सूटकेस के अंदर से एकम का शव बरामद किया। इसके बाद पुलिस ने सीरत कौर को गिरफ्तार कर लिया। जांच के शुरुआती दौर में सीरत ने हत्या करने की बात कबूल कर ली थी।
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एकम हत्याकांड
- फोटो : फाइल
नाबालिग बेटे, नौकरानी और ऑटो चालक की गवाह रही अहम
ट्रायल के दौरान सरकारी पक्ष ने घटनाक्रम साबित करने के लिए कई अहम गवाहों और फोरेंसिक सबूतों का सहारा लिया। मृतक एकम ढिल्लों का 11 वर्षीय बेटा गुरनिवाज सिंह सबसे अहम गवाहों में से एक था। उसने अदालत में बताया कि उसने अपने पिता के चिल्लाने और गोली चलने की आवाज सुनी थी। बच्चे ने यह भी बताया कि घटना वाली रात माता-पिता के बीच झगड़ा हुआ था। गुरनिवाज सिंह ने अपनी मां को तिजोरी से पिस्टल निकालते देखा था।
परिवार की घरेलू कामवाली ने भी अदालत में सीरत की पहचान की थी। कामवाली ने बताया कि उसने घटना के बाद सीरत को घर के अंदर खून के धब्बे साफ करते देखा था। ऑटो-रिक्शा ड्राइवर तुल बहादुर ने अदालत को बताया कि सीरत ने उससे भारी सूटकेस रखने में मदद मांगी थी। सीसीटीवी फुटेज में सीरत को भारी सूटकेस घसीटते और सीढ़ियों की सफाई करते देखा गया। पुलिस ने सीरत की निशानदेही पर घर से हत्या में प्रयुक्त पिस्टल और मैगजीन बरामद की थी।
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एकम हत्याकांड
- फोटो : फाइल
बचाव पक्ष की दलील और अदालत का फैसला
बचाव पक्ष ने ट्रायल के दौरान अदालत में अपनी दलील पेश की। उन्होंने दावा किया कि एकम ने मानसिक तनाव के कारण आत्महत्या की थी। हालांकि, अभियोजन पक्ष ने इस दलील को कई साक्ष्यों के आधार पर खारिज कर दिया। मेडिकल रिपोर्ट और बैलिस्टिक रिपोर्ट सहित अन्य महत्वपूर्ण सबूतों ने आत्महत्या की बात को गलत साबित किया।
अदालत ने चश्मदीद गवाहों के बयानों को अत्यधिक महत्व दिया। हालात से जुड़े सबूतों और फोरेंसिक सामग्री के आधार पर सरकारी पक्ष की बात को सही माना गया। अदालत ने सभी प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का गहन परीक्षण किया। अंततः अदालत ने इसे सुनियोजित हत्या माना। अदालत ने सीरत कौर को हत्या और सबूत मिटाने के लिए दोषी ठहराया। यह फैसला लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद आया है।
परिवार को मिला न्याय और कानून पर भरोसा
मृतक के भाई दर्शन सिंह ढिल्लों ने अदालत के इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि नौ साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद उनके परिवार को आखिरकार न्याय मिला है। दर्शन सिंह ढिल्लों ने बताया कि उनका परिवार अदालत के निर्णय का सम्मान करता है। उन्हें शुरू से ही न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था। यह मामला उनके परिवार के लिए बेहद पीड़ादायक रहा। आठ वर्षों से पूरा परिवार न्याय की उम्मीद में कानूनी लड़ाई लड़ रहा था।
उनके भाई की हत्या ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया था। लंबे मुकदमे के दौरान परिवार ने न्यायिक प्रक्रिया पर अपना विश्वास बनाए रखा। इस फैसले से यह संदेश गया है कि अपराध कितना भी पुराना हो, कानून के दायरे से कोई बच नहीं सकता। दर्शन सिंह ढिल्लों ने जांच एजेंसियों, अभियोजन पक्ष और न्यायालय का आभार व्यक्त किया।