मोहाली। फेज-8 में स्थित गुरुद्वारा श्री अंब साहिब में आयोजित जोड़ मेले में काकी संख्या में लोगों ने रक्तदान कर समाज सेवा की। इस अवसर पर कई लोग ऐसे भी थे जो लंबे समय से रक्तदान करते आ रहे हैं। उन्होंने रक्तदान कर लोगों की सेवा करने को अपने जीवन का हिस्सा बना लिया है। ऐसे लोगोें का मानना है कि रक्तदान से शरीर में कोई कमजोरी नहीं आती और ऐसा करके वह लोगों की सेवा कर पाते हैं। हमारे रक्तदान करने से किसी को नया जीवन मिल पाता है। इस अवसर पर रक्तदाताओं को जोड़ मेले के आयोजकों ने पौधे वितरित करके पर्यावरण बचाने का संदेश दिया।
हर तीन महीने बाद रक्तदान करना नहीं भूलता
मैं कॉलेज के दिनों से ही रक्तदान करता आ रहा हूं। अब मेरी उम्र 50 साल हो गई है, लेकिन हर तीन महीने बाद रक्तदान करना नहीं भूलता। जब भी फेज-7 में किसी भी संस्था की ओर से रक्तदान कैंप लगाया जाता है तो मैं बढ़चढ़कर हिस्सा लेता हूं। वहीं, हर साल गुरुद्वारा श्री अंब साहिब में होने वाले समागम में रक्तदान करना नहीं भूूलता। -रोबिन सिंह, निवासी फेज-7, मोहाली
पहले थोड़ा डर लगा था, लेकिन रक्तदान किया
मैं पंजाब के जिला फरीदकोट का रहने वाला हूं। यहां जोड़ मेले में दूसरी बार रक्तदान किया है। रक्तदान करने से पहले थोड़ा डर लगा कि कोरोना काल में रक्तदान करने का फैसला गलत है। लेकिन फिर मन बना ही लिया और आगे आकर रक्तदान किया। दूसरों की जिंदगी बचाने के लिए हम सभी को रक्तदान करना चाहिए। - मनप्रीत सिंह, निवासी फेज-10, मोहाली
अस्पतालों में न आए खून की कमी
मैं अंबाला का रहने वाला हूं और मोहाली में नौकरी के कारण फेज-10 में एक पीजी में रह रहा हूं। मेरे एक दोस्त ने जोड़ मेले में रक्तदान करने के लिए कहा तो उसे मना नहीं कर सका। इससे पहले मैंने अंबाला में भी रक्तदान किया था। कोरोना काल के दौरान अस्पतालों में काफी लोगोें का इलाज चल रहा है। ऐसे में वहां के ब्लड बैंकों में खून की कमी न आए, इसलिए जब भी मौका मिले तो रक्तदान करना चाहिए। -राहत दाहल, निवासी फेज-10, मोहाली
40 धार्मिक स्थलों पर किया महादान
मेरी उम्र करीब 50 साल की हो गई है। हर साल जोड़ मेले में लगने वाले रक्तदान शिविर से जैसे ही आयोजकों का फोन आता है और रक्तदान के लिए पूछा जाता है तो तुरंत घर से निकल पड़ता हूं। अभी तक 40 बार धार्मिक स्थलों पर लगाए गए रक्तदान शिविर में रक्तदान कर चुका हूं। इससे मुझे खुशी मिलती है। - अमरजीत सिंह, निवासी लांडरां
अब तक 10 बार किया महादान
मैं एयरपोर्ट रोड पर एरोसिटी में रहता हूं। यहां जोड़ मेले में एक समाजसेवी के तौर पर पहुंचा था। यहां रक्तदान शिविर लगा देखा तो रक्तदान करने पहुंच गया। यहां आने के बाद अब तक 10 बार रक्तदान कर चुका हूं और अभी मेरी उम्र 26 साल है। जहां कहीं भी श्री गुरुद्वारा साहिब में रक्तदान शिविर की जानकारी मिलती है तो पहुंच जाता हूं। - शमशेेर सिंह, निवासी एरोसिटी
डाक्टर की सलाह पर किया रक्तदान
जब भी कभी किसी जानकार से मिलने अस्पताल पहुंचता हूं तो वहां देखता हूं कि मरीजों की संख्या काफी ज्यादा होती है। इसके साथ ही यह भी पता चलता है कि अस्पताल में आने वाले मरीजों के लिए हमेशा खून की जरूरत पड़ती ही रहती है। इसलिए समाज सेवा करने का यह भी एक अच्छा जरिया है। यहीं सोचकर मैं रक्तदान करता हूं। इससे पहले मैं काफी जंक फूड खाता था। जब डाक्टर को दिखाया तो पता चला की मेरे शरीर में खून की मात्र ज्यादा है। इसके बाद से डाक्टरों की राय लेकर रक्तदान करना शुरू किया। अब तक 9 बार शिविरों में रक्तदान कर चुका हूं। -जपिंदर सिंह, निवासी जीरकपुर