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कालाबाजारी : 922 का सिलिंडर तीन हजार में बिक रहा

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जीरकपुर। शहर में एलपीजी सिलिंडरों की कालाबाजारी का खेल खुलेआम चल रहा है। 922 रुपये का घरेलू सिलिंडर दो-ढाई से तीन हजार रुपये तक में बेचा जा रहा है। छोटे दुकानदारों को मजबूरी में महंगी गैस खरीदनी पड़ रही है। उनकी रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है। सबसे ज्यादा परेशानी रेहड़ी, पटरी व ठेले-खोमचे वालों को हो रही है। चाऊमीन, बर्गर, पिज्जा, कचौड़ी व अन्य खाद्य सामग्री बेचने वाले दुकानदारों के सामने काम बंद करने तक की नौबत आ रही है। कई लोग चूल्हों पर खाने बनाने को मजबूर हैं। वहीं कुछ मामलों में गैस एजेंसी कर्मचारी और सप्लायर गैस बुकिंग की डेट से पहले ही गैस पहुंचाने का दावा कर रहे हैं, जबकि लोगों को बुकिंग के 19 दिन बाद भी सिलिंडर नहीं मिल रहा है।
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शहर के निवासियों के अनुसार बलटाना, लोहगढ, ढकोली समेत आसपास सिंगपुरा जैसे इलाकों में अवैध गैस रिफिलिंग का धंधा जोरों पर है। यहां विभाग की मिलीभगत से खुलेआम सिलिंडरों में गैस भरकर दो से तीन गुना कीमत पर बेची जा रही है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि इस पूरे खेल में विभागीय मिलीभगत है। इससे कालाबाजारी पर अंकुश नहीं लग पा रहा। सिलिंडर बुकिंग में देरी हो रही है। शहर के कुछ एलपीजी माफिया इसका फायदा उठा रहे हैं। विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से गैस आपूर्ति का खेल चल रहा है।


24 फरवरी को गैस बुक की थी। अभी तक सिलिंडर नहीं पहुंचा है। जब एजेंसी गया तो कहा गया कि आपका सिलिंडर डिलीवर हो चुका है। आप अपने सप्लायर से बात करो। घर सिलिंडर पहुंचा ही नहीं। न ही गैस बुक पर कोई एंट्री हुई है। गैस सप्लाई करने वाले गाड़ी चालक को पूछा तो कह रहा है कि आपका सिलिंडर जा चुका है। यह कालाबाजारी नहीं है तो क्या है? -दिनेश कुमार, निवासी ढकोली
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23 मार्च को गैस बुक की थी। जब गैस लेने गए तो कहा गया कि आपका सिलिंडर तो 19 मार्च को ही घर पहुंच गया। जब एजेंसी के कर्मचारियों को गैस दिखाई तो उन्होंने कहा कि सप्लायर से बात करो। हम इसके जिम्मेदार नहीं हैं। हमें इसकी कोई जानकारी हैं। -खोलाराम, निवासी ढकोली



रसोई गैस को लेकर काफी मारामारी है। मजबूरी में कालाबाजारी में सिलिंडर खरीदना पड़ रहा है। सिलिंडर न मिलने पर काम बंद होने की नौबत आ गई है। एजेंसी वाले रोजाना चक्कर कटवा रहे हैं। -कमलजीत कौर, जीरकपुर



सिलिंडर तो मिल ही नहीं रहा है। करीब 20 दिन से चूल्हे पर खाना बना रहे हैं। लकड़ी का इस्तेमाल कर रहे है। लकड़ी भी तीस रुपये किलो के भाव मिल रही है। खाना भी इतनी जल्दी तैयार नहीं हो रहा है। लंबा घाटा हो रहा है। - अनीत खत्री, बलटाना
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इंडियन ऑयल से जैसे-जैसे सप्लाई आ रही है। वैसे ही सप्लाई कर रहे हैं। -राजेंद्र सिंह, गैस विक्रेता, मिल्खी इंडेन गैस एजेंसी जीरकपुर।
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