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भारत माला प्रोजेक्ट : स्लिप रोड और खेतों तक जाने का रास्ता नहीं देने पर दिया धरना, लगाया जाम

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मोहाली। लांडरां–बनूड़ रोड पर गांव भागोमाजरा से सरहिंद की तरफ बन रहे राष्ट्रीय राजमार्ग पर मछलीखुर्द गांव के निवासियों ने ट्रैक्टर ट्रॉलियां खड़ी कर धरना शुरू कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि भारत माला प्रोजेक्ट के बनने से गांव वालों को खेतों तक पहुंचने का रास्ता हाईवे की वजह से पूरी तरह बाधित हो गया है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव के लिए कोई स्लिप रोड भी नहीं बनाई गई है। पुराने रास्तों को भी नेशनल हाईवे अथॉरिटी ने बंद कर दिया है। इससे न केवल आम लोगों की आवाजाही प्रभावित हो रही है, बल्कि किसान अपने खेतों तक सीधे नहीं पहुंच पा रहे। गांव वालों को अब खेतों तक जाने के लिए कई किलोमीटर लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है। धरने में पहुंचे पूर्व मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू और पूर्व चेयरमैन मार्केट कमेटी हरकेश चंद शर्मा (मछली कला) ने ग्रामीणों की मांग को जायज बताकर उनका समर्थन किया। उन्होंने मौके पर जिला प्रशासन और नेशनल हाईवे अथॉरिटी से फोन पर बात कर ग्रामीणों की वैध मांगों का तुरंत समाधान करने की अपील की। सिद्धू ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों को चाहिए कि वे मौके का दौरा कर किसानों की सहमति से इस समस्या का समाधान निकालें। मौके पर ही उन्होंने हाईवे अथॉरिटी के वरिष्ठ अधिकारियों से फोन पर बात कर गांववासियों की समस्या विस्तार से बताई और यह भी आश्वासन दिया कि वह किसानों का यह मुद्दा मोहाली की डिप्टी कमिश्नर के समक्ष भी उठाएँगे।
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ग्रामीणों की बात नहीं सुनी जा रही
धरने की अगुवाई कर रहे जसवंत सिंह, शेर सिंह (दोनों पूर्व सरपंच), जसविंदर सिंह पूर्व सरपंच गांव गिदड़पुर, दलीप सिंह बाजवा, वरिंदर सिंह, बिक्र्रमजीत सिंह, स्वर्ण सिंह नंबरदार सहित कई ग्रामीण नेताओं ने बताया कि हाईवे निर्माण के दौरान ग्रामीणों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। न तो बातचीत की गई और न ही गांव-खेतों तक पहुंच के लिए जरूरी लांघे बनाए गए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि जब तक स्लिप रोड और खेतों तक जाने के रास्ते बहाल या नए मार्ग उपलब्ध नहीं कराए जाते, तब तक धरना जारी रहेगा। यदि प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया तो वे बड़ी एकजुटता के साथ आंदोलन को और तेज करेंगे।


जमीन एक्वायर हुई, नहीं मिला रास्ता
मछलीकलां निवासी हरकेश चंद शर्मा ने बताया कि भारत माला प्रोजेक्ट के तहत जब जमीन एक्वायर की गई थी, तो उस समय मछलीकलां और मछलीखुर्द की सबसे ज्यादा जमीन प्रोजेक्ट में शामिल हुई थी। इसके बावजूद इन दोनों गांवों को रास्ता नहीं दिया गया है। इस कारण धरना लगाया गया है। सड़क का काम अभी चल रहा है अगर अब रास्ता न दिया गया तो संघर्ष किया जाएगा।
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