मोहाली। 29 साल पुराने आईएएस के बेटे बलवंत सिंह मुल्तानी के अपहरण व हत्या मामले में जिला अदालत ने तत्कालीन एसएचओ कंवल इंद्र पाल सिंह को जांच में शामिल होने के आदेश दिए हैं। कंवल इंद्र पाल सिंह ने जिला अदालत में अग्रिम जमानत के लिए याचिका लगाई थी। याचिका में उन्होंने खुद को बेकसूर बताया था।
अदालत में सुनवाई के दौरान उनके वकील ने तर्क दिया कि आवेदक को वर्तमान केस में झूठा फंसाया गया है। उन्होंने इस तरह का कोई अपराध नहीं किया है। वकील ने बताया कि जब इस मामले की एफआईआर दर्ज की गई थी तो उस समय इसमें उनका नाम तक नहीं था। कंवल इंद्र पाल सिंह पर मात्र यह आरोप है कि बलवंत सिंह मुल्तानी को जिस थाने में रखा गया था, वह उसके तत्कालीन एसएचओ थे।
इसके अलावा मामले के मुख्य आरोपी पंजाब पुलिस के पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी को पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने अग्रिम जमानत दे दी है। ऐसे में यह भी जमानत के हकदार हैं। हालांकि सरकारी वकील की तरफ से कोई विरोध नहीं किया गया। उनका कहना था कि मामले में चालान पेश किया जा चुका है। मामले की जांच जारी है। भविष्य में आरोपी के खिलाफ कुछ सुबूत हो सकते हैं। इसके बाद अदालत ने उन्हें अंतरिम जमानत देते हुए एसएचओ केआईपी सिंह को जांच में शामिल होने के आदेश दिए।
यह है सारा मामला
यह मामला वर्ष-1991 का है। उस समय सुमेध सिंह सैनी चंडीगढ़ के एसएसपी थे। 1991 में उन पर आतंकी हमला हुआ था। सैनी की सुरक्षा में तैनात चार पुलिसकर्मी मारे गए थे, जबकि सैनी घायल हुए थे। पुलिस ने सैनी के आदेश पर पूर्व आईएएस अधिकारी दर्शन सिंह मुल्तानी के सिटको में तैनात इंजीनियर बेटे बलवंत सिंह मुल्तानी को गिरफ्तार किया था। इसके बाद से उसका कुछ पता नहीं चला। यह मामला पहले सुप्रीम कोर्ट तक गया था, हालांकि कुछ साल पहले पंजाब पुलिस के एक बर्खास्त अधिकारी ने एक मैगजीन को साक्षात्कार दिया था, जिसमें उन्होंने बलवंत सिंह मुल्तानी का जिक्र किया था। इसके बाद मुल्तानी के परिजनों ने पुलिस को शिकायत दी थी, जिस पर पुलिस ने मामला दर्ज किया था।