मोहाली। जमीन के लेन-देन में धोखाधड़ी करने समेत कई केसों में उलझे और जेल में बंद जिला मोहाली के एक डेवलपर पर धोखाधड़ी कर जमीन बेचने का एक ओर आरोप लगा है। पीड़ित सुच्चा सिंह निवासी गांव रायपुर जिला मोहाली ने आरोप लगाया है कि डेवलपर ने उसके जाली हस्ताक्षर कर उसकी करोड़ों रुपये की जमीन किसी को आगे बेच दी है। प्रेस कांफ्रेंस में पीड़ित ने बताया कि वह गांव हसनपुर जिला मोहाली में 16 कनाल 2 मरले जमीन के मालिक हैं। उसने इस जमीन का एग्रीमेंट जरनैल सिंह बाजवा के साथ 18 मई 2015 को किया था। इस एग्रीमेंट के मुताबिक एक एकड़ जमीन मूल्य 3.35 करोड़ रुपये तय हुई थी। बयाना राशि के रूप में 30 लाख रुपये नकद के लिए जबकि 70 लाख रुपये और 1.25 करोड़ रुपये के दिए गए चेक बाउंस हो गए। यह राशि भी अदालत जाकर वसूल की गई। इसके बाद 1.10 लाख की राशि का भुगतान किया गया और नो-ड्यू सर्टिफिकेट दिया गया, जिनकी कीमत 81 लाख रुपये है। इसमें से 29 लाख रुपये अभी भी बकाया हैं। नो-ड्यू सर्टिफिकेट में सेक्टर-123 न्यू सन्नी एनक्लेव में तीन रिहायशी प्लॉट और एक शोरूम देने का प्रावधान था, लेकिन जरनैल सिंह बाजवा ने उन्हें कोई प्लॉट या शोरूम नहीं दिया। बिल्डर जरनैल सिंह बाजवा ने जाली हस्ताक्षर और जाली सहमति बनाकर 16 कनाल 2 मरला और सीएलयू लेआउट और गमाडा से नक्शा स्वीकृत करवा लिया। इस संबंध में विजिलेंस विभाग को लिखित शिकायत की गई थी। जरनैल सिंह बाजवा के खिलाफ स्टेट क्राइम थाना फेज-4 में मामला दर्ज करवाया गया, जिसमें उन्हें अभी तक जमानत नहीं मिली है। उनका आरोप है कि जरनैल सिंह बाजवा ने धोखाधड़ी से अपनी जमीन के प्लॉट में कुछ अन्य खसरा नंबर दर्ज करवा लिए, जो स्टे में हैं। इसी तरह एक प्लॉट नंबर 3118 भी बेच दिया गया है। माननीय न्यायालय के स्टे आदेशों का घोर उल्लंघन कर प्लॉट में निर्माण भी किया जा रहा है। इस संबंध में माननीय पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय पंजाब में एक सिविल याचिका दायर की गई है, जो अभी भी लंबित है। सिविल सूट मोहाली कोर्ट में विचाराधीन है। इतना ही नहीं गमाडा द्वारा बिना किसी जांच के नक्शे पास किए जा रहे हैं। उनकी जमीन का सीएलयू लेआउट और नक्शा रद्द करने के लिए गमाडा को लिखित आवेदन दिए गए हैं लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
कोट्स
जब से जरनैल बाजवा पर मुश्किलें आई हैं, तब से कुछ लोग बिना वजह उन पर आरोप लगा रहे हैं। सुच्चा सिंह का अगर कोई भी पैसा देना बनता है तो वह ऑफिस आकर जनरल मैनेजर से कागजातों के साथ मिलें। उन्हें ब्याज के साथ बनती राशि दी जाएगी। -डीके शर्मा, लीगल एडवाइजर बाजवा डेवलपर्स