मोहाली। अतिरिक्त जिला सत्र न्यायाधीश की अदालत ने विजिलेंस टीम से 10 हजार रुपये रिश्वत लेने के मामले में सबूतों के अभाव में सोहाना थाने में तैनात एएसआई बूटा सिंह को बरी करने का आदेश दिया है।
इस मामले में शिकायतकर्ता विदेश गए होने के कारण गवाही देने के लिए अदालत में उपस्थित नहीं हुआ। ऐसे में शैडो गवाह ने अदालत में गवाही देने से इंकार कर दिया, जिसके कारण अदालत ने बूटा सिंह को बरी करने का आदेश दिया।
जानकारी के अनुसार विजिलेंस के सहायक थाना प्रभारी पर कार छोड़ने की एवज में रिपोर्ट सही करने के लिए मेहरबान सिंह से रिश्वत मांगने का आरोप है। मेहरबान सिंह निवासी पेहोवा, हरियाणा हाल निवासी मोहाली ने विजिलेंसस को शिकायत दी थी कि उसे व उसके दोस्त गुरसेवक सिंह को 6 जून 2017 को थाना सोहाना पुलिस ने गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के लगभग एक महीने बाद उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया। जमानत मिलने के बाद उन्होंने अपनी चोरी हुई कार को छोड़ने के लिए अदालत में आवेदन दायर किया।
अदालत ने आवेदन पर वाहन को रिलीज करने का आदेश देते हुए संबंधित थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने का आदेश दिया। जब मेहरबान सिंह अदालत के आदेश पर गाड़ी को रिलीज करने के संबंध में रिपोर्ट दर्ज करवाने के लिए संबंधित सोहाना थाने के सहायक थानेदार बूटा सिंह के पास गए तो थानेदार ने उनसे 18 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की। अंत में 10 हजार रुपए में सौदा तय हुआ। शिकायतकर्ता ने इसकी सूचना विजिलेंस को दी और जाल बिछाकर थानेदार को 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया था।