चंडीगढ़। सेक्टर-18 के टैगोर थिएटर में शनिवार को साहित्योत्सव जश्न-ए-अदब के तहत कल्चरल कारवां ने कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसका शुभारंभ आईआरएस सेवानिवृत्त रश्मि सक्सेना, सेवानिवृत्त आईएएस राजीव आरोड़ा, ज्योति अरोड़ा, प्रो. पूनम अग्रवाल प्रिंसिपल सेक्टर-11 पीजीजीसी ने किया। संस्था के संस्थापक कुंवर रंजीत चौहान ने बताया कि यह सिलसिला चलता रहेगा। एक महीने में चार राज्याें में कार्यक्रम किए हैं। पूनम अग्रवाल ने कहा कि संगीत से शांति मिलती है, जब भी डिस्टर्ब होती हूं तो संगीत सुनती हूं।
आईएएस ललित जैन ने कहा कि वह इस महफिल में दोबारा आए हैं, जब शिमला में था तो वहां पर यह कार्यक्रम हुआ था। संस्था के प्रधान नवनीत सोनी ने कहा कि सेक्टर-11 के कॉलेज में पढ़ा हूं। 1978 में इसी कॉलेज से ग्रेजुएशन किया।
रश्मि सक्सेना ने कहा कि यह कारवां बढ़ता जाएगा। यह कार्यक्रम हमारी सांस्कृतिक धरोहर की प्रतिबिंब बन गया है। इसमें गजल की प्रस्तुति के साथ बदलती हुई जुबान पर चर्चा हुई। इसमें उर्दू और हिंदी कितने दूर और कितने पास विषय पर चर्चा की गई। इसमें पदमश्री अशोक चक्रधर, जस्टिस सहीबुल हसनैन और अनस फैजी ने चर्चा की। इस दौरान काव्य संध्या का आयोजन किया गया। इसमें पदमश्री अशोक चक्रधर सहित अन्य कवियों ने कविताओं का पाठ किया। सोनम कालरा ने सूफी गायन की प्रस्तुति दी। मौके पर भोपाल से आए राजीव सिंह ने फक्कड़ गायिकी पेश की। सोनम कालरा ने दमादम के बाद मैं होश में हूं...सहित एक से बढ़कर एक सूफियाना कलाम पेश किए। राजीव सिंह ने तोरे प्रेम से सिमरूं हरदम, कोई बोले राम राम सहित अन्य गीत पेश किए। लोगों ने तालियां बजाकर उत्साह बढ़ाया।