मोहाली। भले ही राज्य सरकार मोहाली शहर को दुबई और सिंगापुर की तर्ज पर बसा रही है। पॉलीवुड से कई नामी सितारे शहर की शान हैं। कई बॉलीवुड और अन्य भाषाओं की फिल्मों की शूटिंग यहां हो रही है। सरकार फिल्मी सिटी बसाने की दिशा में काम शुरू कर चुकी है। लेकिन अभी तक भी मोहाली में कलाकारों के लिए अपना ऑडिटोरियम नसीब नहीं हो पाया। इसका खामियाजा कलाकारों से लेकर शहर का हर वर्ग भुगत रहा है। वहीं, अब नई नगर निगम बन गई है। ऐसे में कलाकारों की मानें तो नगर निगम के मेयर को इस चीज को समझना चाहिए। साथ ही खुद अपने ही स्तर पर एक ऐसे ऑडिटोरियम का निर्माण करना चाहिए। जिससे जहां शहर को पहचान मिले और कलाकारों को अपनी कला के मंचन का मौका मिल पाए। इस समस्या को लेकर स्थानीय पंजाबी कलाकारों ने कांग्रेस पार्टी से नए बने मेयर अमरजीत सिंह जीती सिद्धू से उम्मीद की है कि अब उनके मन की बात सुनी जाएगी और शहर को रंगमंच के लिए अपना ऑडिटोरियम मिल ही जाएगी। जानकारी के मुताबिक मोहाली 2006 में जिला बना था। इसके बाद से लगातार मोहाली विकास की राह पर है। शहर में अति आधुनिक इमारतों से लेकर अन्य चीजों का निर्माण हो गया है। हालांकि ऑडिटोरियम का सपना नेचर पार्क के नींव पत्थर से आगे नहीं बढ़ पाया। इसके अलावा कुछ पार्कों में ओपन एयर थिएटर हैं, लेकिन उनमें उचित सुविधाएं तक नहीं हैं।
काफी समय से चल रही ऑडिटोरियम की मांग
पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री का 80 से 85 प्रतिशत काम मोहाली से हो रहा है। कई पंजाबी कलाकार मोहाली के ही रहने वाले हैं, ऐसे में जहां चंडीगढ़ में कोई भी कार्यक्रम आयोजित करने के लिए टैगोर थिएटर, कला भवन और कला ग्राम बनाया गया है। ऐसे में मोहाली में भी ऑडिटोरियम बनाया जाना चाहिए। जहां पंजाब के मेले, पंजाबी साहित्य से जुड़ी प्रदर्शनी और पंजाब की सभ्यता से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन करवाया जा सके, साथ ही कलाकारों की ओर से किए जाने वाले स्टेज शो को देखने के लिए मोहाली वासियों को चंडीगढ़ और पंचकूला के ऑडिटोरियम में जाना पड़ता है। जहां पहुंचने में वक्त लगता है। उन्होंने बताया कि 2019 में सभी कलाकारों की ओर से मोहाली के लिए एक अलग से ऑडिटोरियम की मांग रखी गई थी। लेकिन कोरोना काल के कारण इस पर काम नहीं हो पाया। वहीं नए मेयर जैसे ही कुर्सी संभालते हैं, हम सभी कलाकारों की ओर से उनसे इस मामले में विचार-विमर्श किया जाएगा। - गुरप्रीत सिंह घुग्गी, पंजाबी हास्य कलाकार
शहर को ऑडिटोरियम की ज्यादा जरूरत
मैं भी मोहाली के फेज-5 में ही रहता हूं। लंबे समय से मैं थिएयर की दुनिया से जुड़ा हुआ हूं। लेकिन जब कभी अपनी टीम के साथ स्टेज शो करना होता है तो चंडीगढ़ का रुख ही करना पड़ता है। ऐसे में काफी समय लग जाता है। वहीं मोहाली में रहने वाले कलाकारों और थिएयर देखने वाले लोगों के लिए चंडीगढ़ और पंचकूला की तर्ज पर मोहाली में भी रंगमंच के लिए ऑडिटोरियम और कुछ ओपन एयर थिएटर की सुविधा होनी चाहिए। वहीं, जो कुछ ओपन एयर थिएटर हैं, उनकी उचित देखभाल की जानी चाहिए, जिससे वहां कार्र्यकम आयोजित किए जा सकेें। - मलकीत रौणी, पंजाबी कलाकार
किराए पर जगह लेकर करने पड़ रहे कार्यक्रम
चंडीगढ़ में बने कला भवन का विचार लंदन से लाया गया है। एमएस रंधावा ने एक खूबसूरत पार्क के साथ इसका निर्माण करवाया था। मोहाली में अभी तक यह सुविधा नहीं मिल पाई है। जहां आज की तारीख में मोहाली शहर एक फिल्मी हब बन गया है, वहीं हम सभी कलाकारों को किराए पर थिएटर में अपने कार्यक्रम आयोजित करने पड़ते हैं। इसलिए मोहाली के लोगों के लिए भी एक अलग से ऑडिटोरियम बनाया जाना चाहिए। जहां वे शाम को स्टेज शो का आनंद ले सकें और साथ ही नए कलाकारों को भी पंजाब से जुड़ी कला दिखाने का मौका मिल सके। -स्वराज संधू, पूर्व प्रोफेसर, पंजाब यूनिवर्सिटी इंडियन थिएटर।
कलाकारों को करना पड़ता है इंतजार
मैं 15 साल से स्टेज शो से जुड़ा हुआ हूं। इस समय सन्नी एनक्लेव में अपने परिवार के साथ रहा रहा हूं। अगर आज मोहाली का खुद का ऑडिटोरियम बन जाता है तो मुझे सबसे ज्यादा खुशी होगी। क्योंकि हमें अपने शो करने के लिए कला भवन चंडीगढ़ जाना पड़ता है। जो कि सन्नी एनक्लेव से काफी दूर है। वहीं कई बार चंडीगढ़ के कला भवन में जब कोई कार्यक्रम आयोजित करना होता है तो वह पहले से ही बुक होता है। इस कारण वहां अन्य कलाकारों के शो होने की वजह से हमें अपने स्टेज शो की तारीख बदलनी पड़ती है। कई बार तो लंबा इंतजार करना पड़ता है। कला भवन में थिएटर देखने आए लोगों में 90 प्रतिशत दर्शक मोहाली के ही होते हैं। मोहाली के लोगों के लिए खुद का ओपन थिएटर और ऑडिटोरियम होना चाहिए, जिससे नए और पुराने सभी कलाकारों को अपने शहर में ही रंगमंच पर प्रतिभा दिखाने का मौका मिल सके। - इक्कतर सिंह, थिएटर कलाकर।