जीरकपुर। यदि दृढ़ संकल्प और जुनून हो तो शरीर की कमजोरी भी ठीक हो सकती है। कमजोरी को जुनून पर हावी नहीं होने दिया। इसी वजह से 12 वर्ष की अवस्था में सॉफ्ट सारकोमा कैंसर डिटेक्ट होने के बाद भी हिम्मत नहीं हारी। इलाज के साथ पढ़ाई और बाइक चलाने का शौक पूरा किया। आज कैंसर को हराकर प्रोफेशनल बाइकर का सर्टिफिकेट हासिल कर लिया है। यह कहना है बलटाना की पार्वती एनक्लेकव निवासी अन्या का।
अन्या का कहना है कि 12 वर्ष की आयु में उनके पैर पर सॉफ्ट सारकोमा कैंसर डिटेक्ट हुआ था। इसके बाद लगातार चंडीगढ़ पीजीआई से उनका ट्रीटमेंट चला। कैंसर से जूझते और लंबे उपचार के बावजूद पसंदीदा शौक बाइक चलाना नहीं छोड़ा। इसके साथ एमबीए की पढ़ाई भी जारी रखी। कैंसर की वजह से उनके पैर की मांसपेशियां पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाईं। इससे उनको बाइक चलाने में दिक्कत होती थी। मगर अपने सपने को नहीं छोड़ा। अन्या के अनुसार अगर उनकी जगह कोई और होता तो बाइक नहीं चलाता क्योंकि संतुलन बनाने में दिक्कत होती थी।
प्रेरणादायक संघर्ष और पढ़ाई
अन्या का यह संघर्ष केवल बीमारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन के प्रति उनके सकारात्मक दृष्टिकोण को भी दर्शाता है। एक तरफ जहां वह शारीरिक चुनौती का सामना कर रहीं थीं, वहीं दूसरी तरफ वह अपनी एमबीए की पढ़ाई भी पूरी लगन से कर रही थीं। अन्या की यह कहानी उन हजारों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है जो किसी भी तरह की शारीरिक या मानसिक चुनौती का सामना कर रहे हैं। उनका यह जज्बा दिखाता है कि अगर इरादे मजबूत हों तो जीवन में कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती।
1 अगला कदम : वर्ल्ड बाइक रेस में हिस्सा लेना
2 इन शहरों में कर चुकी है प्रोफोम
3 प्रोफेशनल बाइकर का लिया सर्टिफिकेट
4 पढ़ाई में भी होशियार