जीरकपुर। सेहत विभाग की एंबुलेंस सेवा स्टाफ की हड़ताल के कारण तीसरे दिन भी बंद पड़ी है। जिले में 14 एंबुलेंस चल रही हैं, जिनमें से 2 जीरकपुर 1 डेराबस्सी और 1 लालडू क्षेत्र में चल रही है। यह पिछले तीन दिन से खड़ी हैं। मरीजों को निजी वाहन से अस्पताल जाना पड़ रहा है। जबकि एक एंबुलेंस पर 4 स्टाफ सदस्य होते हैं, जिनमें से दो ड्राइवर और दो फार्मासिस्ट होते हैं।
स्टाफ कर्मचारियों ने बताया कि वह पिछले 10-12 सालों से 108 नंबर पर काम कर रहे हैं। पिछले दस सालों से उनकी तनख्वाह 9500 रुपये थी और अभी भी यही स्केल चल रहा है। जबकि वह कंपनी के अंडर काम कर रहे हैं और कंपनी के अधिकारियों को कई बार वेतन बढ़ाने का आवेदन भी किया गया है, लेकिन कंपनी द्वारा उनकी सुनवाई नहीं की जा रही। उनके साथ बदतमीजी की जाती है और जब भी वह अपने अधिकार के चलते विरोध करते हैं तो उन्हें वहां से बदलकर दूर भेज दिया जाता है या फिर उन्हें बर्खास्त कर दिया जाता है।
कंपनी पर घपलेबाजी के आरोप
हड़ताल पर बैठे स्टाफ मनप्रीत सिंह, सरबजीत सिंह, अंग्रेज सिंह, मलकीत सिंह, राकेश कुमार, सतनाम सिंह, सतपाल सिंह, हरप्रीत सिंह व अमनदीप सिंह आदि ने बताया कि पिछले दस सालों से उनका वेतन नहीं बढ़ा जबकि कंपनी के बड़े स्तर के अधिकारियों का वेतन दो गुना हो गया है। कंपनी को पंजाब सरकार द्वारा एक साल का 4 करोड़ रुपये टेंडर के हिसाब से दिया जाता है। इसमें वेतन, गाड़ी का डीजल और गाड़ियों की मरम्मत व बाकी खर्च करने के बाद भी एक करोड़ से ऊपर राशि बच जाती है, लेकिन वह हमें फिर भी परेशान कर रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाए की कंपनी में बड़े स्तर पर घपले बाजी की जा रही है। पिछले दस सालों से एक ही कंपनी के पास इसका टेंडर चल रहा है। जायज मांगों के साथ साथ कंपनी बदलने की मांग भी कर रहे हैं।
कोट्स
वेतन दो दिन में दे दिया जाएगा। रही बात वेतन बढ़ाने की तो हमारा स्टाफ स्टेट वेजिज के आधार पर रखा गया है और स्टेट की पॉलिसी के तहत वेतन में बढ़ोतरी की गई है। यदि उन्हें कोई समस्या है तो वह आकर हमसे मिल लें उनकी समस्या हल कर दी जाएगी।
-पंकज शर्मा, ऑपरेशन हेड, पंजाब