जीरकपुर। एक जगह से दूसरी जगह जाकर इंसान ही नहीं पशुओं को मन भी नहीं लगता है। इसका एक मामला छतबीड़ जू में देखने को मिल रहा है। वहां 17 अगस्त को गुजरात से तीन मेहमान अक्षित (शेर), दृष्टि (शेरनी) और गौरी (सफेद बाघिन) लाए गए हैं। वहां से लाने के बाद दृष्टि और गौरी तो माहौल में ढल गई है और वे पूरी डाइट ले रही हैं पर अक्षित अब तक गुजरात के जंगल को भूला नहीं है। 15 दिन में उसने सिर्फ दो दिन ही खाना खाया और अब वह सिर्फ सूप पी रहा है। छतबीड़ जू में आए नए मेहमान अक्षित को जू के माहौल में ढलने में अभी समय लग सकता है। शनिवार को उसकी देखरेख कर रहा कर्मचारी उसकी खैरियत जानने पहुंचा तो गुस्से में अक्षित ने उसकी उंगलियों पर दांत गड़ाकर उसे घायल कर दिया।
इस संबंध में जू डायरेक्टर एम सुधाकर का कहना है कि किसी भी नए जानवर को नए माहौल में ढलने में आमतौर और 3 से 4 हफ्ते का समय लगता है।जू में पहुचे तीन नए मेहमानों का स्वास्थ्य ठीक है और उनकी लगातार निगरानी और चिकित्सा जांच की जा रही है। उन्होंने इस बात की भी पुष्टि की कि जू में जानवरों के स्वास्थ्य जांच व देखरेख करने वाले कम्पाउंडर गोपाल दास की उंगली पर शेर ने दांत गड़ा दिए थे पर घाव इतना गंभीर नहीं है।