करोड़ों रुपये की ड्रग तस्करी से जुड़े मामले में पटियाला जेल में बंद अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने मंगलवार को अदालत में याचिका दायर कर कहा कि वे वहां सुरक्षित नहीं है। वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान मजीठिया ने खुद भी कहा है कि ऑल इज नॉट वेल। उन्हें बार-बार एक से दूसरी जगह पर शिफ्ट किया जा रहा है। ऐसे में उन्हें पहले वाली बैरक में वापस भेजा जाए। इस संबंध में अदालत ने पंजाब सरकार और जेल सुपरिंटेंडेंट को छह अप्रैल तक के लिए नोटिस जारी किया है।
इस बीच अदालत ने मजीठिया की न्यायिक हिरासत 14 दिन के लिए बढ़ा दी है। साथ ही कहा है कि अगली पेशी पर उन्हें निजी तौर पर पेश होना होगा। मजीठिया के वकील एचएस धनोआ, अर्शदीप सिंह और डीएस सोबती ने याचिका के माध्यम से अदालत से कहा कि उनके मुवक्किल को सरकार की ओर से जेड प्लस सुरक्षा मिली है। वह खालिस्तानी आतंकवादियों के निशाने पर हैं। उन्हें गैंगस्टरों से भी धमकियां मिली हुई हैं।
सोमवार की रात डीआईजी जेल की ओर से मजीठिया को फांसी चक्की बैरक में भेजने की कोशिश की गई। वहां पर मौत की सजा प्राप्त कैदियों को रखा जाता है। इस संबंधी जेल अधिकारियों ने डीआईजी को बताया है कि आरोपी को फांसी चक्की में नहीं ले जाया जा सकता, क्योंकि वहां पर उनकी हाजिरी नहीं लगाई जा सकती। इसके बाद मजीठिया को जोरा चक्की में तबदील कर दिया। जो कि फांसी चक्की से बिल्कुल अलग है।
मजीठिया पर पिछली कांग्रेस सरकार के समय में केस दर्ज हुआ था। इसके बाद उन्होंने जेल से बचने के लिए हाईकोर्ट तक जंग लड़ी थी। हाईकोर्ट ने उन्हें चुनाव के बाद आत्मसमर्पण के आदेश दिए थे। इसके बाद से वह जेल में ही हैं। वहीं, राज्य में नई आप की सरकार आने के बाद अब इस मामले के लिए गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम को बदल दिया गया था।