जीरकपुर। शहरवासियों के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार मंगलवार से लावारिस कुत्तों की नसबंदी का काम शुरू हो गया है। पहले दिन चार कुत्तों की नसबंदी की गई। करीब 33 लाख रुपये की लागत से शुरू इस अभियान के तहत अगले एक साल में 2000 लावारिस कुत्तों की नसबंदी करने का लक्ष्य रखा गया है। जीरकपुर क्षेत्र में बढ़ती कुत्तों की संख्या और उनसे जुड़े हादसों को देखते हुए यह पहल बेहद अहम मानी जा रही है। इस योजना को शुरू करने में कई अड़चनें आईं और तीन बार टेंडर प्रक्रिया विफल रही। इसके चलते काम लंबे समय तक लटका रहा।
अब टेंडर प्रक्रिया मुकम्मल होने के बाद कंपैशन फॉर एनिमल वेलफेयर एसोसिएशन पटियाला (कावा) संस्था को यह जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद काम ने रफ्तार पकड़ ली है। अधिकारियों ने बताया कि शुरुआत में उन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा रही है, जहां से लावारिस कुत्तों की सबसे अधिक शिकायतें प्राप्त हुई हैं। इसके लिए शिकायतों के आधार पर टीमों को मौके पर भेजा जा रहा है, ताकि लोगों को जल्द राहत मिल सके। स्थानीय निवासियों ने इस पहल का स्वागत कर उम्मीद जताई है कि इससे लावारिस कुत्तों की बढ़ती संख्या पर नियंत्रण लगेगा और लोगों को आए दिन होने वाली परेशानी से निजात मिलेगी। यह अभियान तय समय सीमा में पूरा होता है, तो शहर में सुरक्षा और स्वच्छता दोनों के स्तर में सुधार देखने को मिल सकता है।
सारी कानूनी अड़चनों को दूर करने के बाद आज जीरकपुर शहर में लावारिस कुत्तों की नसबंदी का काम शुरू कर दिया गया है। दो माह पहले कावा संस्था को टेंडर प्रक्रिया मुकम्मल होने के बाद वर्क आर्डर जारी कर दिया था, लेकिन उस समय काम शुरू नहीं हो पाया था। -परविंदर सिंह भट्टी, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद जीरकपुर
हमने आज जीरकपुर में लावारिस कुत्तों की नसबंदी का काम शुरू कर दिया है। शुरू में शिकायतों का निपटारा किया जा रहा है। इसके तहत पहले दिन चार कुत्तों की नसबंदी की गई है। शिकायतों का निपटारा करने के बाद रूटीन में तेजी लाई जाएगी। - प्रदीप बजाज, वरिष्ठ अधिकारी, कंपैशन फॉर एनिमल वेलफेयर एसोसिएशन, पटियाला