मोहाली। लालड़ू थाने में वर्ष 2018 में दर्ज हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट के मामले की सुनवाई जिला अदालत में हुई। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले में नामजद आरोपी अमरजीत सिंह उर्फ गेजी को से बरी कर दिया है। अदालत ने फैसला सुनाया कि अभियोजन पक्ष आरोपी को कथित मामले से जोड़ने में विफल रहा है।
सह-ग्रामीण होने के बावजूद उसे किसी गवाह ने नहीं पहचाना। उसकेकथन पर किरच की बरामदगी घटना उसको जोड़ने के लिए पर्याप्त नहीं है, जबकि यह साबित नहीं हुआ है कि घटना में उक्त हथियार का इस्तेमाल किया गया था। अभियोजन पक्ष का मामला यह है कि गुरजंट सिंह ने पीड़ित गुरप्रीत सिंह पर गोली चलाई। पुलिस ने गुरजंट सिंह और उसके साथ आए अन्य हमलावरों को पकड़ने का कोई प्रयास नहीं किया।
इस मामले में आरोपी की मिलीभगत साबित करने के लिए अभियोजन पक्ष ने कोई ठोस सबूत नहीं दिया। अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ धारा 307, 341, 506 आईपीसी, 192 मोटर व्हीकल एक्ट के तहत लगाए गए आरोपों को साबित करने में बुरी तरह विफल रहा है। आरोपित को उक्त धाराओं से बरी किया जाता है।
ये है मामला
यह मामला शिकायतकर्ता मनप्रीत सिंह के बयान पर दर्ज किया गया था, जिसमें आरोप था कि वह चचेरे भाई गुरप्रीत सिंह को जेएस कोचिंग सेंटर अत्री कॉलेज रोड, लालड़ू मंडी में ट्यूशन से रोजाना गांव ले जाता था। 23 अगस्त 2018 को जब वह कोचिंग सेंटर में पहुंचा, तो आरोपी गुरजंट सिंह दो लोगों के साथ, जिन्होंने चेहरे ढके थे एक मोटरसाइकिल (बिना नंबर) के साथ वहां खड़े थे। शाम करीब 6 बजे उसका चचेरा भाई गुरप्रीत सिंह ट्यूशन सेंटर से बाहर आया और तुरंत उपरोक्त गुरजंट सिंह और दो अज्ञात व्यक्तियों ने उसे घेर लिया। गुरजंट सिंह ने गुरप्रीत सिंह की बाहें मरोड़ दी और उसे एक पिस्टल दिखाई जिसे वह अपने डब में रखता था। जब शिकायतकर्ता ने अपने चचेरे भाई को बचाने की कोशिश की, तो दो अज्ञात लोगों ने उस पर हमला कर दिया। गुरजंट सिंह के साथ आए व्यक्तियों ने शिकायतकर्ता को पकड़ लिया और इसी बीच गुरजंट सिंह ने देसी पिस्टल गुरप्रीत सिंह की कनपटी पर लगा दी और दो बार ट्रिगर दबाया लेकिन पिस्टल नहीं चली। डर के कारण गुरप्रीत सिंह अचेत हो गया। गुरजंट सिंह ने दोबारा पिस्टल का ट्रिगर दबाया लेकिन गोली गुरप्रीत सिंह के सिर के ऊपर से निकल गई। शिकायतकर्ता ने शोर मचाया जिस पर उपरोक्त हमलावर गुरप्रीत सिंह को जान से मारने की धमकी देकर मौके से भाग गए। उपरोक्त दो अज्ञात हमलावर अपने साथ किरच लेकर आए थे और मौके से भागते समय वे किरच दिखा रहे थे। इस मामले में वर्ष 1998 में गुरजंट सिंह के पिता हरबिलास ने अपने चाचा कुलदीप सिंह के खिलाफ झूठा मामला दर्ज करवाया था और उक्त मामले में उसके चाचा को बरी कर दिया गया था।
रंजिश के चलते गुरजंट सिंह ने दो अज्ञात व्यक्तियों के साथ मिलकर अपने चचेरे भाई गुरप्रीत सिंह को जान से मारने की नीयत से घेर लिया था। उक्त बयान के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू हुई। जांच के दौरान माधो सिंह ने एएसआई जसविंदर सिंह को बयान दिया कि घटना वाले दिन अमरजीत सिंह उर्फ गेजी व एक अन्य अज्ञात व्यक्ति गुरजंट सिंह के साथ देखे गए थे। माधो सिंह के बयान के आधार पर अमरजीत सिंह उर्फ गेजी को मौजूदा मामले में नामजद कर गिरफ्तार कर लिया गया था, जबकि मुख्य आरोपी गुरजंट सिंह को गिरफ्तार नहीं किया गया। यह मामला अदालत में विचाराधीन था।