संवाद न्यूज एजेंसी
जीरकपुर। प्रीत कॉलोनी में खंभों पर फैला तारों का जाल अब 20 हजार से ज्यादा लोगों के लिए बड़ा खतरा बन गया है। बिजली, इंटरनेट और अन्य संचार सेवाओं की तारें गलियों और रास्तों में नीचे तक झूल रही हैं। इससे वाहन चालकों और राहगीरों को हर समय हादसे का डर सताता है। संबंधित विभागों की लापरवाही पर सवाल उठ रहे हैं। कई स्थानों पर तारें सड़क के काफी करीब पहुंच गई हैं। एक ही खंभे पर बिजली की तारों के साथ बड़ी संख्या में केबल लपेटी गई हैं। इससे तारों का गुच्छा बन गया है और खंभों पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है। पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) पर बिजली लाइनों की देखरेख की जिम्मेदारी है। वहीं, इंटरनेट और टेलीकॉम केबल डालने वाली कंपनियों को अपनी तारें निर्धारित तरीके से लगानी चाहिए। उन्हें अनावश्यक या खराब केबल हटाने की भी जिम्मेदारी निभानी होगी। सड़क के ऊपर कम ऊंचाई पर लटकती तारों को लेकर नियमित निरीक्षण और कार्रवाई आवश्यक है। नगर परिषद जीरकपुर के ईओ परविंदर सिंह भट्टी ने इस समस्या पर संज्ञान लिया है।
बारिश और तेज हवा में बढ़ सकता है खतरा
प्रीत कॉलोनी में ढीली तारों की समस्या बारिश और तेज हवा के दौरान और गंभीर हो सकती है। खराब मौसम में तारों के अधिक नीचे आने या आपस में उलझने की आशंका रहती है। तारें टूटकर सड़क पर भी गिर सकती हैं। सड़क के करीब लटक रही केबलें बड़े वाहनों के संपर्क में आ सकती हैं। इससे यातायात प्रभावित होने के साथ हादसे का खतरा भी बढ़ सकता है। बारिश में बिजली की तारों से जुड़ी खराबी से खतरा और बढ़ जाता है।
भारी संख्या में रोजाना आवाजाही करते हैं लोग
प्रीत कॉलोनी अंबाला-चंडीगढ़ हाईवे के आसपास का एक प्रमुख रिहायशी क्षेत्र है। कॉलोनी और आसपास के इलाकों में 20 हजार से अधिक लोग रहते हैं। बड़ी संख्या में लोग रोजाना नौकरी, कारोबार और स्कूल के लिए यहां से आवाजाही करते हैं। कॉलोनी की गलियां और संपर्क मार्ग आसपास के प्रमुख रास्तों को जोड़ते हैं। इससे दिनभर वाहनों की आवाजाही बनी रहती है। बढ़ती आबादी के साथ तारों का नेटवर्क भी बढ़ा है, जिससे सार्वजनिक रास्तों पर बुनियादी ढांचे को सुरक्षित रखना जरूरी है।
कोट
स्ट्रीट लाइट्स के खंभों पर लटक रहे अन्य तारों को जल्द हटाया जाएगा। इससे खंभों पर बने तारों के जाल से लोगों को हो रही परेशानी दूर होगी। हादसों का खतरा भी कम होगा। कर्मचारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिया जाएगा। व्यवस्था को व्यवस्थित करने के लिए कदम उठाए जाएंगे। - परविंदर सिंह भट्टी, ईओ