मोहाली। बंदी सिखों की रिहाई के लिए शहर के वाईपीएस चौक पर पक्का मोर्चा लगाकर बैठे कौमी इंसाफ मोर्चे के जत्थे ने दिवाली के दिन रविवार को मार्च निकाला। यह मार्च निकालकर वह बुड़ैल जेल के बाहर बैठकर बंदी सिखों की रिहाई के लिए अरदास करने के लिए निकले। इसके बाद मोहाली और चंडीगढ़ की पुलिस ने इन सभी प्रदर्शनकारियों को सीमा पर ही रोक लिया। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी बुड़ैल जेल के बाहर तक जाने के लिए जिद पर अड़े रहे सड़क पर बैठकर जाप करने लगे। लेकिन पुलिस के रोकने पर कुछ देर बाद ही स्थिति तनावपूर्ण हो गई, निहंग प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के लिए पुलिस ने वहां फोर्स तैनात करके रास्ते को पूरी तरह से बंद कर दिया। लेकिन निहंग प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठे जाप करते रहे। इसके बाद मोर्चे के नेताओं ने फैसला लिया कि जब तक वह जेल के बाहर बैठकरअरदास नहीं करेंगे तब तक वह मोर्चे पर वापस नहीं लौटेंगे। तीन घंटे के लगातार प्रदर्शन के बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को अपनी गाड़ियों में बैठाया और उन्हें बुड़ैल जेल के बाहर ले गए। जेल के बाहर निहंगों ने बंदी सिखों की रिहाई के लिए अरदास की। इसके बाद वापस सभी को वापस मोहाली बॉर्डर पर छोड़ दिया गया जिसके बाद सभी मोर्चे में शामिल हो गए।
दरअसल, मोर्चे की ओर से बंदी छोड़ दिवस पर जेलों में बंदी सिखों की रिहाई के लिए जेलों के बाहर अरदास करने का फैसला लिया गया था। इस आह्वान पर दिल्ली और पंजाब की अलग-अलग जेलों के बाहर बंदी सिखों की रिहाई के लिए सिख जत्थेबंदियां पहुंची। मोहाली के वाईपीएस चौक पर लगे पक्के मोर्चे के नेताओं ने भी बुड़ैल जेल के बाहर अरदास करने का एलान किया था। चंडीगढ़ और मोहाली पुलिस को यह अलर्ट पहले ही मिल चुका था। रविवार सुबह पुलिस ने बैरिकेडिंग करके रास्ता बंद कर दिया था। पुलिस को आशंका थी कि निहंग माहौल खराब कर सकते हैं, इसलिए पुलिस ने पूरा बंदोबस्त किया हुआ था। सुबह 10 बजे जैसे ही कौमी इंसाफ मोर्चे से भाई पाल सिंह फ्रांस, वकील दिलशेर सिंह, जसविंदर सिंह राजपुरा, इंदरवीर सिंह जत्थे के साथ चंडीगढ़ बुड़ैल जेल के लिए रवाना हुए मोहाली-चंडीगढ़ पुलिस ने उन्हें सीमा पर ही रोक लिया। इस मौके पर कौमी इंसाफ मोर्चे के नेताओं ने कहा कि बंदी सिखों की रिहाई तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।