लोगों को साफ व सुरक्षित खाद्य व पेय पदार्थ मुहैया कराने के लिए सरकार ने फूड सेफ्टी एक्ट लागू किया। जिसके तहत रजिस्ट्रेशन आदि के लिए चार अगस्त-12 तक का समय बचा है। लेकिन अब तक मोहाली जिले में किसी भी कारोबारी ने रजिस्ट्रेशन नहीं करवाया है। लाइसेंस लेने वालों की संख्या भी बहुत कम है। कम्यूनिकेशन गैप के चलते ज्यादातर कारोबारियों को एक्ट के बारे में पता ही नहीं है। जो कानून लागू होने की राह में सबसे बड़ी बाधा है। इसी को दूर करने के लिए अमर उजाला एक अभियान शुरू कर रहा है। जिसमें कारोबारियों के सवालों, शंकाओं और हिचकिचाहटों के जवाब देंगे जिला सेहत अफसर डॉ. जय सिंह।
000000
1. सवाल - फेज-5 श्री गुरुदेव मार्ट के मालिक हरप्रीत सिंह ने कहा कि हम 25 सालों से सारा सामान पैकिंग में बेच रहे हैं। इसके लिए बाकायदा लिफाफे छपवाते हैं। हम चाहते हैं कि प्रोडक्ट संबंधी सारी जानकारी बार कोड पर देने की इजाजत दी जाए।
जवाब - कानून के मुताबिक प्रोडक्ट के संबंध में सारी जानकारी लेबल के ऊपर दी जानी चाहिए। बार कोड पर सारी जानकारी देना संभव ही नहीं है।
000000000
2. सवाल - फेज-5 स्थित हरबंस सिंह तारा सिंह कंपनी के मालिक सतपाल सिंह ने कहा कि छोटे दुकानदारों के लिए भी लाइसेंस फीस दो हजार रुपये है, जबकि रेहड़ी वालों के लिए सौ रुपये है। यह भेद क्यों है।
जवाब - एक्ट के मुताबिक जिन दुकानदारों का सालाना टर्न ओवर बाहर लाख से ज्यादा है उन्हें दो हजार रुपये सालाना लाइसेंस फीस देनी होगी। उससे कम वालों को सौ रुपये रजिस्ट्रेशन फीस देनी होगी।
0000000
3. सवाल - फेज सात स्थित रिएलटेक कन्फेक्शनर के मालिक रजनीश कुमार का कहना है कि ब्रांडेड प्रोडक्ट के सैंपल दुकानदार के यहां से क्यों भरे जाते हैं। बल्कि जहां पर कंपनी द्वारा तैयार की जाती है। उसी जगह पर उनके सैंपल भरे जाने चाहिए।
जवाब - जिले में जो भी मैनुफैक्चरिंग यूनिट हैं, उनसे सैंपल लिए जाते हैं। कई कंपनियां जिले ही नहीं, राज्य से भी बाहर हैं, इसलिए स्थानीय अधिकारियों के लिए उनकी सैंपलिंग संभव नहीं है।