मोहाली। कोरिया में बनने जा रहे वर्ल्ड काइट म्यूजियम में मोहाली की पतंगें सजाई जाएगीं। इससे जहां पूरे वर्ल्ड में शहर को अलग पहचान मिलेगी। वहीं, म्यूजिम देखने आने वाले लोग भी भारतीय कारीगिरी से रूबरू हो पाएंगे। यह संभव होने जा रहे शहर के साइंटिस्ट दविंदर पाल सहगल के प्रयास से। जिनकी पांच पतंगें म्यूजियम में प्रदर्शित करने के लिए चुनी गई है।
डॉ. सहगल भारत से इकलौते व्यक्ति हैं। जिनको इस प्रोजेक्ट के लिए चुना गया। डॉ. सहगल भी अपनी इस उपलब्धि को लेकर काफी खुश है। उन्होंने बताया कि म्यूजियम की मैनेजमेंट ने उन्हें पांच पतंगे भेजने के लिए कहा। उन्होंने कड़ी मेहनत से पांच पतंग तैयार की हैं। सभी पतंग एक स्पेशल थीम लिए हुए हैं। जिसमें उन्होंने विश्व शांति का संदेश से लेकर पानी बचाने व नशों से दूर रहने तक का संदेश दिया है। उन्होंने पतंगों के जरिए अपनी पुरातन संस्कृति को दिखाने की भी कोशिश की है। डॉ. सहगल ने बताया कि म्यूजियम की मैनेजमेंट ने उनसे पतंगों की कीमत के बारे में पूछा था। लेकिन उन्होंने पतंगों के पैसे लेने से साफ मना कर दिया था। उन्होंने मैनेजमेंट से मांग की थी कि उन्हें म्यूजियम के शुभांरभ वाले दिन बुला लिया जाए। उन्होंने बताया कि वर्ल्ड काइट मुकाबले के लिए जब वह चाइना गए थे। उसी दौरान उनकी मुलाकात म्यूजियम की मैनेजमेंट से हुई थी।
पीयू से शुरू हुआ था पतंग बनाने का सफर
डॉ. दविंदर पाल सिंह सहगल ने बताया कि पतंग तो वह बचपन से ही उड़ा रहे हैं। लेकिन पतंग बनाने का पहला तुजुर्बा पीयू में ही मिला। 1980 में जब पीयू के केमेस्ट्री डिपार्टमेंट से बीएससी कर रहे थे। उसी दौरान पीयू ने बसंत पंचमी पर पतंग बनाने व उड़ाने का मुकाबला करवाया। जिसमें उनके बनाए पतंग को फर्स्ट प्राइज मिला। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। वह हर विशेष मौके पर पतंग तैयार करते हैं। इसके अलावा उन्होंने इस उपलब्धी के चलते पंजाब सरकार, चंडीगढ़ प्रशासन स्टेट अवार्ड से सम्मानित कर चुका है। लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में उनका नाम दर्ज हो चुका है। डॉ. सहगल पंजाब फोरेंसिक लैब असिस्टेंट डॉयरेक्टर के पद पर तैनात है।
कई देशों के पतंग होंगे प्रदर्शित
कोरिया में वर्ल्ड काइट म्यूजियम में पूरी दुनिया के पंतग प्रदर्शित होंगे। यह पार्क करीब दस हिस्सों में बसाया जा रहा है। जहां पर पतंग उड़ाने का अनुभव भी लोग उठा पाएंगे। यह पूरी दुनिया में अपनी तरह का पहला म्यूजियम है। म्यूजियम 2014 में शुरू होगा।