जीरकपुर। छतबीड़ चिड़ियाघर में घड़ियाल ने डेढ़ साल बाद एक बार फिर करीब डेढ़ दर्जन बच्चों को जन्म दिया है। इससे पहले भी यह घड़ियाल कई बार बच्चों को जन्म दे चुकी है, लेकिन कभी भी बच्चे बचे नहीं। कभी नर घड़ियाल इन्हें खुद ही खा गया और कभी मौसम के चलते यह मर गए।
इस बार विशेष सावधानी बरती गई है। घड़ियाल के इन बच्चों को अस्पताल के पास ही बनाए गए बाडे़ में रखा गया है। बच्चों की देखरेख डाक्टरों की टीम कर रही है। छतबीड़ में घड़ियाल के बच्चों को बचाना एक चुनौती है, क्योंकि इससे पहले जितने भी बच्चों ने यहां जन्म लिया है। लाख कोशिशों के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका। बच्चे कुछ महीने ही जीवित रह सके।
चिड़ियाघर में पहले भी कई बार घड़ियाल ने बच्चों को जन्म दिया। पहली बार तो नर घड़ियाल बच्चों को खा गया। दूसरी बार सर्दी में निमोनिया होना कारण बताया गया। हालांकि उन्हें बचाने के लिए एक शीशे का घर बनाया गया था, जिसमें तापमान ठीक रखने के लिए हीटर तक लगाए गए थे। घड़ियालों को बचाने के लिए विटामिन-ई विद बी कांप्लैक्स और एंटीबाइटिक कैप्सूल भी दिए गए थे, लेकिन फिर भी बच्चों को बचाया नहीं जा सका। जू प्रबंधकों का मानना है कि इस बार गर्मी का मौसम है। यह मौसम घड़ियालों के लिए अनुकूल रहता है। उन्हें उम्मीद है कि इस बार घड़ियाल जरूर बच जाएंगे।