पंचकूला। परिवार में बेटा सिविल सर्विस या इंजीनियरिंग करे..। यह ख्वाब था मनीष के फूफा शमशेर सिंह महिंद्रा का। जिसे पूरा करने के लिए मात्र पांच साल की उम्र में फैसला लिया था। कई सालाें की मेहनत जब मनीष की जिंदगी में मंगलवार को यूपीएससी की ओर से इंडियन इंजीनियरिंग परीक्षा 2013 में आठवें रैंक के साथ रंग लाई तो इस खुशी को बांटने के लिए उनके साथ उनके पिता सामान फूफा नहीं थे। उनकी फरवरी महीने में हार्ट अटैक से मृत्यु हो गई। मनीष नरवाल ने इंडियन इंजीनियरिंग परीक्षा 2013 में आठवां रैंक हासिल करने की खुशी जश्न के साथ तो नहीं मनाई, लेकिन अपने बुआ सोनिया सिंह महिंद्रा और अपने दोनों छोटे भाई बहन के साथ घर पर ही मनाई। तीन साल की उम्र में मनीष फूफा के पास रहने आए थे। उनके पिता यमुना नगर के गांव सागढ़ी में किसान हैं। मनीष ने अपनी खुशी अमर उजाला संग बांटते हुए कहा कि उनके फूफा पिता समान हैं और उनकी खुशी अब अधूरी लग रही है। डीएवी सेक्टर-8 से दसवीं एवं डीएवी कालेज सेक्टर-10 से बारहवीं करने के बाद मनीष ने मुलाना से 2010 बीटेक 73 फीसदी अंक से पास की। इसके साथ उन्होंने दिल्ली में इंजीनियरिंग की कोचिंग ली। 24 वर्षीय मनीष ने कहा कि उनका अगला लक्ष्य सिविल सर्विस में जाना है क्योंकि यह सपना उनके फूफा का है।
दिन के 10 से 12 घंटे देता था पढ़ाई को
24 वर्षीय मनीष ने बताया कि इस परीक्षा के लिए उन्होंने दिन के 10 से 12 घंटे पढ़ाई की है। दसवीं के बाद ही उन्होंने फैसला कर लिया था कि वह उन्हें इंजीनियरिंग ही करनी है। मनीष ने कहा कि उनके पिता नाथी राम नरवाल किसान हैं। इसलिए फूफा अपने पास ले आए। उनके पास से ही रह रहे हैं।
सोशल साइट एवं टीवी नहीं देखते
छात्र ने बताया कि वे खुद को सिर्फ और सिर्फ पढ़ाई में व्यस्त रखते है। टीवी कभी नहीं देखते। सोशल साइट में भी कोई रुचि नहीं हैं। मनीष ने बताया कि वे युवाओं को सलाह देना चाहते हैं कि लक्ष्य पाने के लिए सिर्फ लगन एवं मेहनत की जरूरत होती है। मनीष ने बताया कि उनकी मां सुमिता नरवाल उनके आठवां स्थान हासिल करने पर बहुत उत्साहित हैं।