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पशुधन विकास पर खर्च होंगे चार सौ करोड़

Sat, 08 Dec 2012 05:30 AM IST
Mohali
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मोहाली। पंजाब में आने वाले तीन सालों के दौरान पशुधन और डेयरी फार्मिंग को प्रोत्साहित करने के लिए चार सौ करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। किसानों को खेती के साथ फायदेमंद सहायक धंधे अपनाने को प्रेरित किया जाएगा। राज्य में एग्रो बेस्ड इंडस्ट्री स्थापित की जाएगी। यह विचार मुख्य संसदीय सचिव एनके शर्मा ने चप्पड़चिड़ी ग्राउंड में चल रहे पशु मेले के समापन पर व्यक्त किए। उन्होंने विभिन्न मुकाबलों में विजेता पशुपालकों को साढ़े पांच लाख रुपये के इनाम, ट्रॉफी और सर्टिफिकेट भी दिए।
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सीपीएस शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार किसानों को रवायती फसलों से हटकर फायदेमंद फसलों की काश्त करने को प्रेरित कर रही है। उन्हें तकनीकी जानकारी भी मुहैया करा रही है। जत्थेदार उजागर सिंह बडाली ने कहा कि पशु मेले, पशु पालकों के लिए फायदेमंद साबित हो रहे हैं। डिप्टी डायरेक्टर डॉ. मुखविंदर सिंह ने मेले के बारे में जानकारी दी।
मेले के दौरान हुए दूध चुआई के मुकाबले में प्यारा सिंह भागोमाजरा की भैंस और ज्ञान सिंह धड़ाक कलां की गाय ने पहला स्थान प्राप्त किया। बलजिंदर सिंह लखनौर का नुकरा घोड़ा और हरजीत सिंह मदनहेड़ी का मारवाड़ी घोड़ा पहले स्थान पर रहा। मारवाड़ी एडल्ट में जतिंदर बाकरपुर का घोड़ा जीता। बलवीर सिंह दुराली की मुहरा झोटी, दर्शन सिंह मनाणा की देसी ब्रीड की बकरी, सुनील कुमार चप्पड़चिड़ी का बछड़ा नुकरा, जगविंदर सिंह छतबीड़ की मुहरा कट्टी पहले स्थान पर रहे।
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इसी तरह राजू चप्पड़चिड़ी के देसी मुरगे व रणजीत सिंह अभयरपुर की बत्तख ने पहला स्थान हासिल किया। कई अन्य मुकाबलों के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया। इस मौके पर एसजीपीसी मेंबर परमजीत कौर लांडरां, बलजीत कुंभड़ा, अमरीक सिंह मलकपुर, बिपन बंसल, सुखविंदर छिंदी, मनजीत सिंह, हरपाल चन्ना, जोरा सिंह भुल्लर, रविंदर सिंह रवी, सुंदर सिंह भी मौजूद थे।

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विजेता घोड़ी दिखेगी अलबम में
पशु मेले के दौरान घोड़ियों के नाचने के मुकाबले आकर्षण का केंद्र रहे। ढोल की थाप पर थिरकती घोड़ियों को देख लोगों ने खूब तालियां बजाईं। इस दौरान मुकाबले की विजेता घोड़ी टफी के ट्रेनर गुरमेल सिंह ने बताया कि टफी पहले भी कई अवार्ड जीत चुकी है। जल्द ही यह पंजाबी अलबम में नजर आएगी। जिसकी शूटिंग फतेहगढ़ साहिब एवं आसपास के इलाकों में हुई है। यह अलबम हरप्रीत मांगट द्वारा तैयार की जा रही है। घोड़ी की कीमत करीब साढ़े पांच लाख रुपये है। इस पर हर हफ्ते पांच हजार रुपये खर्च होता है।

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चंडीगढ़ के पुलिस अधिकारी पहुंचे
चंडीगढ़ के डीएसपी सुमन कुमार और वेटरिनरी डॉक्टर भी खासतौर पर पशु मेले में पहुंचे। उन्होंने करीब तीन घंटे मेले में बिताए। इस दौरान उसने मेले में आए सभी नस्लों के घोड़ों का जायजा लिया और उनकी खूबियों को जाना।
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