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जीरकपुर : एमकेयर अस्पताल ने मृतका की लाश डिलीवर करने के बदले मांगे डेढ़ लाख..

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एमकेयर अस्पताल में महिला की मौत, शव के बदले मांगे डेढ़ लाख
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समाजसेवी ने सोशल मीडिया पर वायरल किया वीडियो, बाद में 10 हजार में हुआ समझौता
अमर उजाला ब्यूरो
जीरकपुर। वीआईपी रोड पर स्थित एमकेयर मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल में इलाज के दौरान महिला की मौत हो गई। परिजन शव लेने पहुंचे तो अस्पताल प्रबंधन ने डेढ़ लाख रुपये की मांग की। परिजन अस्पताल का बिल अदा करने में असमर्थ थे, ऐसे में समाज सेवी सोनू सेठी ने अस्पताल प्रबंधन द्वारा डेढ़ लाख रुपये मांगने और पीड़ित द्वारा मदद का गुहार लगाने का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। इसकी जानकारी मिलते ही अस्पताल प्रबंधन ने आनन-फानन में डेढ़ लाख के बजाय 10 हजार रुपये लेकर शव परिजनों के हवाले कर दिया और समझौता पेपर पर हस्ताक्षर करवा लिए। परिजन शव यमुनानगर ले गए जहां मृतका का अंतिम संस्कार किया।
यमुनानगर के पाला राम रिक्शा चलाकर अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं। उसकी पत्नी अंगूरी देवी (45) को अचानक छाती में दर्द हुआ और पाला राम उसे चंडीगढ़ पीजीआई ले आया। कुछ दिन वहां रखने के बाद उसने पत्नी को एमकेयर अस्पताल जीरकपुर में 23 फरवरी को दाखिल करवाया। यहां डॉक्टरों ने उसकी काउंसिलिंग के बाद ट्रीटमेंट शुरू किया। पीड़िता 6 से 7 दिन तक दर्द से कराहती रही और डॉक्टरों ने उसे वेंटिलेटर पर रखा था। पाला राम ने अपने किसी जानकार से रुपये उधार मांगकर इलाज की फीस के पहले 95 हजार और फिर 15 हजार रुपये जमा कराए। वहीं, सोमवार को अंगूरी देवी की मौत हो गई।
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कोट्स
सोनू सेठी पर करूंगा मानहानि का केस : अस्पताल डायरेक्टर
वीआईपी रोड जीरकपुर में स्थित एमकेयर अस्पताल के डायरेक्ट अभितेज निबर का कहना है कि समाज सेवी सोनू सेठी ने वीडियो क्लिप बनाकर और उसे सोशल मीडिया पर वायरल करके उनके अस्पताल को बदनाम करने की कोशिश की है। इसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करूंगा। अस्पताल प्रबंधन की तरफ से उसके खिलाफ अदालत में मानहानि का दावा ठोका जाएगा।
बाक्स
मैंने सच्चाई का साथ दिया, इसके लिए सजा भुगतने को तैयार
समाजसेवी एवं सेठी ढाबा के मालिक सोनू सेठी का कहना है कि एक रिक्शा चलाकर अपने परिवार का पालन पोषण करने वाला कैसे लाखों रुपये का बिल दे सकता है। मैंने सच्चाई का साथ दिया है, जिसके लिए अगर उन्हें कोई सजा भुगतनी पड़ती है तो उसे हंसकर भुगतने के लिए तैयार हैं।
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कोट्स
प्राइवेट अस्पताल हमारे अधिकार क्षेत्र में नहीं आते, इसलिए हमारा इस मामले में बोलना नहीं बनता। हां, अगर कोई हमारे पास इसकी शिकायत लेकर आता है तो उसकी विभागीय जांच की जाती है।
-संगीता जैन, एसएमओ, सिविल अस्पताल डेराबस्सी।
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