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पसीने की लगा दी कमाई, टूटे आशियाने कहा जाए भाई

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- बहलोलपुर में मकान गिराए जाने के बाद लोग आए आफत में
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- लोगों ने कहा कि जब मकान बन रहे थे तो गमाडा ने क्यों नहीं रोका लोगों को
- अब लोगों ने गमाडा के खिलाफ संघर्ष की रणनीति को किया तैयार

अमर उजाला ब्यूरो
मोहाली। ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथारिटी (गमाडा) द्वारा सोमवार को बहलोलपुर में गिराए गए 70 के करीब मकान में रहने वाले लोग आफत में आ गए हैं। लोगों का कहना है कि खून पसीने की कमाई लगाकर घर बनाए थे, लेकिन गमाडा ने एक ही झटके में उनका सब बर्बाद कर दिया है। अब उन्हें समझ ही नहीं आ रहा है कि आखिर उनका क्या बनेगा। वहीं, लोग इस मामले में आरपार की लड़ाई लड़ने के मूड में हैं। उन्होंने कहा कि जल्दी ही इस मामले में पंजाब हाउंसिग एंड अर्बन डेवलपमेंट डिपार्टमेंट के सीनियर अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। साथ ही जरूरत पड़ी तो परिवार सहित पुडा भवन के बाहर संघर्ष करने से भी पीछे हटेंगे।

दिव्यांग दंपति को सता रहा घर टूटने का डर
इस मौके दिव्यांग कुसुम व धीर सिंह ने बताया कि उन्होंने साल 2018 में घर बनाया था। धीर सिंह ने बताया कि वह कंपनी में नौकरी करते हैं। मकान के लिए उन्होंने लाख रुपये का लोन लिया था। इसकी सारी किश्तें उनकी सैलरी में से कट रही है, लेकिन सोमवार को गमाडा ने एकदम आकर इलाके में तोड़ फोड़ कर दी। उन्होंने बताया कि उन्होंने जमीन की बाकायदा रजिस्ट्री करवाई है। सारे भुगतान किए हैं, लेकिन गमाडा की इस कार्रवाई ने परिवार को हिला दिया है। उन्होंने बताया कि अगर उनका मकान टूट जाता है तो वह कहा जाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर मकान अवैध थे, तो गमाडा ने बनते समय इन्हें क्यो नहीं रोका था।
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अब किश्तें भरेंगे या किराए पर घर खरीदेंगे
संजय कुमार ने बताया कि वह चंडीगढ़ के एक स्कूल में तैनात हैं। उन्होंने ढाई मरले का प्लॉट खरीदा था। साथ ही मकान बनाया था। उनका हर महीने करीब पंद्रह से अठारह हजार लोन की किश्त दे रहे हैं। लेकिन अब उनके घर तोड़ दिया है। ऐसे में वह रोड़ पर आ गए हैं। उनका आरोप है कि एक तो पहले अगर सबकुछ अवैध था, तो प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री क्यों होने दी गई। इसके अलावा गमाडा ने जब मकान बन रहे थे तो उस समय क्यो नहीं तोड़े। वहीं, उन्होंने कहा कि मकान तोड़ना तो किसी समस्या का हल नहीं था। गमाडा को चाहिए था कि मकानों को सील कर देता। उन्होंने बताया कि अब घर टूट गया है। ऐसे में वह कोई घर किराए पर लेंगे या किश्तें भरेंगे।

आखिर अब उनके मकान का क्या बनेगा
नरिंदर सिंह ने बताया कि उन्होंने करीब डेढ़ साल पहले घर खरीदा था। उन्होंने बताया कि वह बाइक रिपेयर का काम करते हैं, लेकिन मकान टूट जाने से उनके सपने मिट्टी में मिल गए। अब वह इस जगह का क्या करेंगे। उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा है।
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लोगों के मकानों की मरम्मत करने का किया दावा
दूसरी तरफ मकान बनाने बिल्डर ने लोगों को विश्वास दिलाया है कि उन्हें परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी। वह उनके मकानों की मरम्मत करवाकर देगा। इसके अलावा अपनी तरह से लोगों की हर मदद करेगा।
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