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दंपति आए तालाक लेने, लोक अदालत ने किए एक

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‘एक महीने साथ बिताएं, उसके बाद समस्या बताएं’
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तलाक लेने आए दंपति को लोक अदालत ने दी सलाह
अदालत ने बच्चों व परिवार को देखकर लिया फैसला
अमर उजाला ब्यूरो
मोहाली।
लोक अदालत में शनिवार को एक ऐसे दंपति पहुंचे, जो शादी के आठ साल बाद अब अलग रहना चाहते हैं। दंपति के दो बच्चे हैं, जो स्कूल में पढ़ते हैं। पति-पत्नी एक दूसरे पर आरोप लगाते हैं कि वह अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाते। जज ने उनसे कहा कि तलाक किसी समस्या का हल नहीं है। पति-पत्नी अपने बच्चों के साथ रहें। एक महीने तक साथ रहें। उसके बाद अदालत को बताएं कि समस्या क्या है। इसके बाद उन्हें घर भेज दिया। पति-पत्नी के पारिवारिक मेंबर इस फैसले से खुश हैं।
महिला के पति ने बताया कि 2008 में उनकी शादी हुई थी। दोनों का विवाह धूमधाम से हुआ था। परिवार भी अच्छा चल रहा था। इसी बीच दो बच्चे हो गए। पत्नी अचानक मायके वालों के बहकावे में आकर मोहाली आ गई और उस पर मारपीट व दहेज उत्पीड़न का केस दर्ज करवा दिया। इसके बाद किसी तरह मामला निपटा। फिर उसने शर्त रखी कि वह ससुराल में नहीं रहेगी। पति को उसके साथ मोहाली में रहना होगा। पति का कहना था कि उसकी मां बुजुर्ग है। ऐसे में अपनी मां को अकेले छोड़ नहीं सकता है। इसके अलावा महिला के सारे खर्च भी उठाए जा रहे हैं। जज ने महिला की दलीलों को भी सुना। उसका कहना था कि वह दावे बड़े-बड़े करते हैं, लेकिन बाद में पीछे हट जाते हैं। जज ने दोनों को समझाया कि परिवार को तोड़ने से कोई फायदा नहीं होगा। दोनों को एक महीने तक एक साथ रहने का आदेश देकर खुशी-खुशी घर भेज दिया।
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दो साल में ही आई रिश्ते में दरार
इसी तरह का एक अन्य मामला लोक अदालत में आया था। मामले के अनुसार, लड़का निजी कंपनी में काम करता है जबकि लड़की हाउस वाइफ है। दोनों का विवाह पूरे रीति रिवाजों के साथ हुआ था, लेकिन एक साल बाद ही दोनों के रिश्ते में संदेह की दरार आ गई। करीब एक साल से दोनों एक-दूसरे के खिलाफ जंग लड़ रहे थे। लोक अदालत में दोनों पक्षों में समझौता हुआ। जज के समझाने के बाद युवक अपनी पत्नी को खुशी खुशी घर ले गया। जज ने कहा कि पति-पत्नी में अक्सर नोक झोंक होती है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि तलाक से ही समस्याएं हल हों। जज ने परिवार के बुजुर्गों को भी बच्चों को समझाने की हिदायत दी।
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