मसौल में सभ्यता के अवशेषों को तलाशने में नया मोड़
वन विभाग ने जमीन की खुदाई पर लगाया अड़ंगा
विभाग का कहना है कि जमीन की खुदाई से पर्यावण को पहुंचेगा नुकसान
अमित शर्मा
मोहाली।
गांव मसौल में सदियों पुरानी सभ्यता के अवशेषों को तलाशने में अब वन विभाग ने अड़ंगा डाल दिया है। वन विभाग का कहना है कि उनके अधीन आने वाली जमीन में खुदाई की अनुमति नहीं दी जा सकती है। क्योंकि इससे इको सिस्टम को नुकसान पहुंचेगा। वहीं, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) का कहना है कि उन्हें जिला प्रशासन से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है। ऐसे में उनके प्रोजेक्ट में देरी चल रही है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, वह करीब एक साल से जमीन एक्वायर करने की प्रक्रिया में लगे हुए हैं। इसके लिए कई बार मोहाली जिला प्रशासन को विभाग की तरफ से रिमांडर भी भेजे गए हैं। प्रशासन की तरफ से उन्हें कोई जवाब नहीं मिला है। ऐसे में विभाग को प्रोजेक्ट में देरी हो रही है।
विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, उन्होंने आखिरी बार एक महीना पहले जिला प्रशासन को रिमांडर भेजा था। प्रशासन के जवाब का इंतजार किया जा रहा है। वहीं, प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से पहले ही जमीन एक्वायर करने को कहा गया था। विभाग के अधिकारी भी प्रशासन के अधिकारियों से मिल चुके हैं। डीसी गुरप्रीत कौर सपरा का कहना है कि मामला उनके ध्यान में है। उन्होंने इस संबंध में वन विभाग के अधिकारियों से पूछा था कि आखिर काम में देरी क्यों हो रही है। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया है कि अवशेषों को तलाशने के लिए जिस जमीन की निशानदेही की गई है, वहां पर खुदाई की अनुमति नहीं दे सकते। क्योंकि वह एरिया इको सेंसिटिव जोन के अधीन आता है। उन्होंने बताया कि अगले 15 दिनों में संबंधित अफसरों के साथ मीटिंग की जाएगी।
प्रधानमंत्री मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति भी हुए थे प्रभावित
गांव मसौल में प्राचीन सभ्यता के अवशेष दफन हैं। इसके प्रमाण फ्रांस व भारत के पुरातत्वविदों की टीम को पहाड़ पर की गई खुदाई से मिल चुके हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने इसमें रुचि दिखाई है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को इस दिशा में काम करने को कहा गया है। फ्रांसीसी और भारतीय अधिकारियों को पहाड़ों पर खुदाई के दौरान जीवाश्म मिले थे। कुछ समय पहले जब फ्रांस के राष्ट्रपति चंडीगढ़ आए थे तो उनके सामने इन जीवाश्मों को प्रदर्शित किया गया था। उस दौरान प्रधानमंत्री मोदी भी काफी प्रभावित हुए थे। उन्होंने संबंधित विभाग को जमीन अधिगृहीत करने को पत्र लिखा था।