डेराबस्सी। दिवाली की रात पटाखों से झुलसने के कारण बच्चों समेत कुल 24 लोग घायल हो गए। इन सबको इलाज के लिए डेराबस्सी के सिविल अस्पताल में पहुुंचाया गया। पिछले साल की तुलना में इस बार झुलसने वालों की संख्या बढ़ी है। इनके अलावा कुछ घायल निजी अस्पतालों में भी पहुंचे थे। किसी के हाथ में बम फटा तो किसी के हाथ में अनार चल गया। दर्द से परेशान बच्चे दर्द से निजात पाने के लिए हाथ ऊपर उठाकर घूमते नजर आए।वहीं, एक बच्चे को झुलसने से बचाने की कोशिश में उसके पिता समेत दो लोग घायल हो गए, लेकिन बच्चे को घायल होने से बचाने में नाकाम रहे। इस संबंधी गांव महमदपुर निवासी बलजीत सिंह ने बताया कि उनका 10 साल का बेटा और पड़ोसी का बच्चा बम का मसाला इकट्ठा कर रहे थे और उसमें आग लगाने लगे थे। जैसे ही उन्हें रोकने के लिए आगे बढ़े तब तक धमाका उनके हाथ में हो गया, और हाथ झुलस गया।
इसी तरह पाॅम सिटी में निवासी राकेश यादव ने बताया कि उनका भतीजा गली में खड़ा हुआ था तभी किसी ने बम में आग लगाकर उन पर फेंक दिया। भतीजे को बचाने के लिए उसने बम को हाथ से एक तरफ हटाने की कोशिश की, लेकिन बम उसके हाथ में ही फट गया। दोनों के हाथ जलने के कारण वह इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे थे।
बता दें कि दिवाली की रात पटाखों से घायल हुए लोग डेराबस्सी अस्पताल में शाम से ही पहुंचने लगे थे। गांव भांखरपुर निवासी गुरविंदर सिंह के हाथ में अनार जल गया था। गांव कुडावाला का 14 वर्षीय अंकुर भी हाथ में बम फटने से इलाज के लिए अस्पताल पहुंचा था। वह इलाज के लिए अस्पताल आए घायल दर्द से तड़प रहे थे। डॉक्टर दर्द को रोकने के लिए जले हुए हाथों पर औषधीय इंजेक्शन लगा रहे थे। इसके बावजूद भी जब मरीजों को आराम नहीं मिला तो मरीज हाथ ऊपर किए खड़े नजर आए। उन्होंने कहा कि दवा का असर कम है, हाथ ऊपर रखने से कुछ राहत मिलती है। इसके चलते तमाम मरीज हाथ ऊपर उठाकर घूमते नजर आए।
एक बच्चे की आंख में लगी चोट
एसएमओ डाॅ. धरमिंदर सिंह ने बताया कि दिवाली की रात 22 घायल इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे थे, जिनमें से आठ बच्चे थे। बम फटने से एक की आंख और बाकी के हाथ में चोट लगी है। इलाज के बाद सभी को छुट्टी दे दी गई।