कम्युनिटी सेंटर में अदालतों की मंजूरी का विरोध शुरू
नगर काउंसिल ने शुक्रवार चार बजे मीटिंग बुलाई
पूर्व काउंसलर ने कम्युनिटी सेंटर की जगह अन्य इमारत देने की मांग की
अमर उजाला ब्यूरो
डेराबस्सी।
पंजाब सरकार की ओर से नगर परिषद को भरोसे में लिए बिना कम्युनिटी सेंटर में दो अस्थायी अदालतों की मंजूरी देने के मामले ने तूूल पकड़ लिया है। इसके विरोध में नगर परिषद के कार्यकारी प्रधान मुकेश गांधी ने शुक्रवार को दोपहर बाद चार बजे सभी काउंसलरों की मीटिंग बुलाई है, जिसमें इस मसले के हल के लिए चर्चा की जाएगी। दूसरी ओर शहर की संस्थाओं ने मंगलवार को इस मामले में अपना विरोध दर्ज करवाया है। नगर परिषद के पूर्व काउंसलर और भाजपा के जिला उपप्रधान मास्टर विपिन थम्मन ने कहा कि सरकार ने इस फैसले को न बदला तो वह संघर्ष करने के लिए मजबूर होंगे।
जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार की ओर से डेराबस्सी के कम्युनिटी सेंटर में दो अस्थायी अदालतें चलाने को मंजूरी दी गई है। जबकि इस बारे में सरकार ने नगर परिषद को भी भरोसे में लेना जरूरी नहीं समझा। पीडब्ल्यूडी विभाग ने नगर परिषद को कोई जानकारी दिए बिना ही कम्युनिटी सेंटर में अस्थायी अदालतें स्थापित करने के लिए टेंडर भी जारी कर दिए हैं। इस बारे में नगर परिषद के प्रधान और अधिकारियों को पत्रकारों से जानकारी मिली।
फैसले के खिलाफ प्रस्ताव पास कर भेजेंगे सरकार के पास
नगर परिषद के कार्यकारी प्रधान एडवोकेट मुकेश गांधी ने कहा कि अब तक किसी विभाग द्वारा कम्युनिटी सेंटर में अस्थायी अदालतें स्थापित करने के बारे में सूचित नहीं किया गया। गांधी ने कहा कि अमर उजाला की तरफ से सोमवार को मामला उनके ध्यान में लाया गया, जिसके बाद उन्होंने शुक्रवार को चार बजे पार्षदों की मीटिंग बुलाई है। गांधी ने कहा कि यह कम्युनिटी सेंटर शहर का अकेला सामूहिक इमारत है, जहां इलाके के लोग दुख सुख के समागम करते हैं। इस इमारत की जरूरत को देखते हुए पंजाब सरकार को अपना फैसला बदलकर अस्थायी अदालतें किसी अन्य इमारत में शिफ्ट करनी चाहिए। गांधी ने कहा कि कम्युनिटी सेंटर को बचाने के लिए सभी पार्षद एकजुट हैं और इसके खिलाफ प्रस्ताव पास कर पंजाब सरकार को भेजने के अलावा जल्द हाईकोर्ट की बिल्डिंग समिति के समक्ष रोष दर्ज करवाकर इस फैसले को बदलने की मांग करेंगे।
14 गांवों के लोगों के लिए एक सांझी इमारत
नगर परिषद के पूर्व काउंसलर और भाजपा के जिला उपप्रधान मास्टर विपिन थम्मन ने कहा कि डेराबस्सी में प्रशासन के पास कई इमारतें खाली पड़ी हैं, जहां अस्थायी अदालतें स्थापित की जा सकती हैं। तहसील कांप्लेक्स के सामने पटवार खाने की इमारत लंबे समय से खाली पड़ी है, वहां पर अदालत स्थापित की जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि पुराने शहर के अलावा शामिल किए 14 गांवों के लोगों को विवाह समेत अन्य समागम करने के लिए इलाके में सिर्फ एक सांझी इमारत है, लेकिन यहां भी अदालतें स्थापित हो गई हैं तो लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ेगी। इसके अलावा गुरु नानक नाम लेवा सोसायटी ने इस फैसले का विरोध करते हुए इसे बदलने की मांग की है। एसडीएम खरड़ (अतिरिक्त प्रभार डेराबस्सी) अमनिंदर कौर बराड़ ने कहा कि यदि शहर वासियों की तरफ से उन्हें कोई एतराज दिया जाता है तो वह पंजाब सरकार तक पहुंचा देंगीं।