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मोहाली: आवारा कुतों के आतंक से निपटने को निगम नहीं उठा सका ठोस कदम, कई बच्चों को काटा

Mon, 08 Jul 2019 10:44 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोहाली
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बच्चे को कुत्ते ने काटा - फोटो : अमर उजाला
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पंचकूला में लावारिस कुत्ते की ओर से एक बच्ची को नोंचने की वारदात के बाद मोहाली के लोगों में भी डर का माहौल है। मोहाली में लगातार लावारिस कुत्तों की संख्या में इजाफा होता जा रहा है, लेकिन नगर निगम के पास इनसे निपटने के लिए कोई ठोस रणनीति नहीं है।
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जिला अस्पताल में हर हफ्ते लावारिस कुत्तों के काटने के करीब 20 मामले पहुंचते हैं, जो स्थिति की गंभीरता को बताते हैं। पिछले सालों के दौरान मोहाली में लावारिस कुत्तों के काटने के कई मामले सामने आ चुके हैं। इसके बावजूद निगम अभी तक कोई ठोस कदम उठाने में विफल रहा है।

लावारिस कुत्ते मोहाली के लिए बड़ा सिरदर्द बन चुके हैं। गलियों, सड़कों से लेकर पार्कों तक में इनकी दहशत है। नगर निगम ने लावारिस कुत्तों की नसबंदी को लेकर भी जो प्रोजेक्ट चलाया उसके भी सार्थक नतीजे सामने नहीं आ सके हैं। पिछले दिनों हुई नगर निगम हाउस की मीटिंग में लावारिस कुत्तों का मुद्दा उठाया गया था।
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इसके बाद पार्षदों की एक कमेटी बनाई गई है, जो लावारिस कुत्तों से निजात दिलाने के लिए सुझाव देगी। बेंगलुरू और राजस्थान की कुछ नगर काउंसिलों ने लावारिस कुत्तों से लोगों को निजात दिलाई है। कमेटी उनके मॉडल को स्टडी कर मोहाली को भी लावारिस कुत्तों से निजात दिलाने के सुझाव देगी। बहरहाल लोगों में लावारिस कुत्तों की दहशत बनी हुई है।

 
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कई बच्चे हो चुके हैं लावारिस कुत्तों का शिकार

पिछले कुछ समय के दौरान लावारिस कुत्तों ने मोहाली में कई लोगों को गंभीर रूप से जख्मी किया है, जिनमें ज्यादातर बच्चे हैं। कुछ समय पहले सेक्टर 70 में लावारिस कुत्तों ने एक बच्चे को बुरी तरह नोंच डाला था। उसे गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती करवाया गया। इसी तरह का एक मामला पूर्व सांसद प्रेम सिंह चंदूमाजरा द्वारा गोद लिए गए गांव दाऊं में भी सामने आया था।

जहां हड्डारोड़ी के लावारिस कुत्तों ने पेड़ से जामुन तोड़ रहे एक बच्चे को बुरी तरह नोंच डाला था। उसकी बाद में सर्जरी करनी पड़ी थी। करीब दो साल पहले मोहाली के फेज 2 में गली में खेल रहे दो साल के बच्चे को लावारिस कुत्तों ने नोंच डाला। कुत्ते उसका होंठ काट कर खा गए थे। पीजीआई में इस बच्चे की सर्जरी हुई थी।

स्टिक लेकर करनी पड़ती है सैर
फेज 2 में रहने वाले अमित कुमार बताते हैं कि सुबह-शाम की सैर हो या फिर पास की मार्केट सामान लाना हो, बिना स्टिक हाथ में लिए बाहर निकलना खतरे से खाली नहीं है। बच्चों को तो अकेले बाहर भेज ही नहीं सकते। यहां तक कि पार्क में भी बच्चों को नहीं भेज सकते। लावारिस कुत्तों का आतंक इस कदर है कि इनके ग्रुप कब, किस पर हमला कर दें कह नहीं सकते।
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