पंचकूला में लावारिस कुत्ते की ओर से एक बच्ची को नोंचने की वारदात के बाद मोहाली के लोगों में भी डर का माहौल है। मोहाली में लगातार लावारिस कुत्तों की संख्या में इजाफा होता जा रहा है, लेकिन नगर निगम के पास इनसे निपटने के लिए कोई ठोस रणनीति नहीं है।
जिला अस्पताल में हर हफ्ते लावारिस कुत्तों के काटने के करीब 20 मामले पहुंचते हैं, जो स्थिति की गंभीरता को बताते हैं। पिछले सालों के दौरान मोहाली में लावारिस कुत्तों के काटने के कई मामले सामने आ चुके हैं। इसके बावजूद निगम अभी तक कोई ठोस कदम उठाने में विफल रहा है।
लावारिस कुत्ते मोहाली के लिए बड़ा सिरदर्द बन चुके हैं। गलियों, सड़कों से लेकर पार्कों तक में इनकी दहशत है। नगर निगम ने लावारिस कुत्तों की नसबंदी को लेकर भी जो प्रोजेक्ट चलाया उसके भी सार्थक नतीजे सामने नहीं आ सके हैं। पिछले दिनों हुई नगर निगम हाउस की मीटिंग में लावारिस कुत्तों का मुद्दा उठाया गया था।
इसके बाद पार्षदों की एक कमेटी बनाई गई है, जो लावारिस कुत्तों से निजात दिलाने के लिए सुझाव देगी। बेंगलुरू और राजस्थान की कुछ नगर काउंसिलों ने लावारिस कुत्तों से लोगों को निजात दिलाई है। कमेटी उनके मॉडल को स्टडी कर मोहाली को भी लावारिस कुत्तों से निजात दिलाने के सुझाव देगी। बहरहाल लोगों में लावारिस कुत्तों की दहशत बनी हुई है।