मोहाली। अंतरराष्ट्रीय पुआधी मंच ने पुआध के कवि भक्त आशा राम बैदवाण की सोहाना स्थित समाधि पर पहले पुआधी सम्मेलन कराया। इसमें पुआधी जुबान और पुआध की जवानी को बचाने की आवाज उठी। सम्मेलन में मोहाली, रोपड़, पटियाला, फतेहगढ़ साहिब के अलावा हरियाणा से बड़ी संख्या में लोगों ने शिरकत की। मंच ने पुआध के बाकी क्षेत्रों में भी सम्मेलन कराने और पुआधी सभा बुलाने का ऐलान किया।
मंच के सदस्यों बीबी परमजीत कौर लांडरां, परमदीप सिंह बैदवाण, डॉ. करमजीत सिंह कमान, डॉ. गुरमीत सिंह बैदवाण, मनमोहन कौर संतेमाजरा और हरदीप सिंह बठलाना ने इस मौके पर पांच संकल्प पेश किए। इनमें पुआधी कवि भक्त आशा राम सोहाना की याद में यूनिवर्सिटी में चेयर स्थापित करने, माझे, मालवे, दोआबे की तरह पुआध की सीमा रेखा करके पुआध को पंजाब के चौथे क्षेत्र के तौर पर स्वीकृत करने और इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया में पुआध को अलग तौर पर प्रसारण, पुआधी साहित्य को स्कूली और यूनिवर्सिटी सिलेबस का हिस्सा बनाने की मांग उठाई गई। आखिरी संकल्प के द्वारा पुआधियों को अपनी दुकानों के बोर्ड, शादियों के कार्ड पुआधी में छपवाने और हर जगह पुआधी बोलने सहित विवाहों और अन्य समागमों पर फिजूल खर्ची घटाने का आह्वान किया गया। पंजाब के आईएएस अधिकारी काहन सिंह पन्नू ने पुआधी सम्मेलन की सराहना की। उन्होंने भक्त आशा राम बैदवाण की याद में चेयर स्थापित करने और पुआधी की अलग सीमा रेखा जैसी मांगों को सरकार के ध्यान में लाने का भरोसा दिया।
पुआधी पर मंडरा रहे संकट से निपटने को एकजुट होने का आह्वान
डॉ. गुरमीत सिंह बैदवाण ने पुआधी की दशा, दिशा और स्थिति के बारे में एक रिसर्च पेपर पढ़ते हुए पुआधियों को अपनी मातृभाषा पुआधी के साथ जुड़ने का न्योता दिया। इस मौके पर मोहिनी तूर, सोनी सरसीनी, चरण पुआधी, रोमी घड़ामे वाला, भूपिंदर मटौरिया ने पुआधी गीतों की शानदार पेशकारी की। पुआधी के गद्य लेखक मनजीत राजपुरा ने भी पुआधी के अस्तित्व पर मंडरा रहे संकट से निपटने के लिए पुआधियों को एकजुट होने का न्योता दिया। पुआध के अखाड़ा परंपरा को आगे बढ़ा रहे पुआधी गायक समर सिंह शंमी ने तीन घंटे से अधिक अखाड़ा लगा के पुआधी में अलग अलग प्रसंग सुनाए।
इस मौके पर पूर्व पीसीएस अधिकारी बलबीर सिंह ढोल, जिला परिषद मेंबर ठेकेदार मोहण सिंह बठलाना, गुरध्यान सिंह दुराली, चंडीगढ़ के डिप्टी मेयर हरदीप सिंह बटरेला, मान सिंह सोहाना, सतवंत कौर जौहल, जगजीत सिंह रोपड़, साधु सिंह खलौर, जगतार गिल, जगतार सिंह ढेलपुर के अलावा बड़ी संख्या में पंच-सरपंच मौजूद थे। इस मौके पर अलग-अलग लेखकों ने पुआधी किताबों के स्टाल भी लगाए।