मोहाली। गांव माणकपुर कल्लर के किसान हरबाज सिंह रिवायती खेती छोड़ मछली पालन से दोगुनी आमदनी कर रहे हैं। प्रति एकड़ 20 से 25 क्विंटल मछली का उत्पादन कर हरबाज सिंह ढाई लाख रुपये प्रति एकड़ कमा रहे हैं। हरबाज ने पांच साल पहले मछली पालन का धंधा शुरू किया था। मछली पालन के जरिए जहां उन्होंने अपनी आमदनी में इजाफा किया, वहीं तालाब के पानी का सिंचाई में इस्तेमाल कर रिवायती फसलों की पैदावार को भी बढ़ाया।
हरबाज सिंह ने मछली पालन विभाग द्वारा संचालित पांच दिन के मुफ्त सिखलाई कैंप में ट्रेनिंग ली, जिसमें उसे तालाब तैयार करने, मछली की पालने लायक किस्मों की जानकारी देने, उनकी देखभाल करने से लेकर मंडीकरण तक की ट्रेनिंग दी गई। इसके बाद उसने वर्ष 2014 में अपनी 1.60 एकड़ जमीन पर तालाब बना मछली पालन शुरू किया। शुरुआत के लिए विभाग द्वारा राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत 1 लाख 24 हजार रुपये सबसिडी भी दी गई। हरबाज सिंह ने बताया कि वह सालाना 20 से 25 क्विंटल मछली का उत्पादन कर रहे हैं। यह मछली 100 रुपये प्रति किलो के दाम पर मंडी में बिकती है, जिससे उसे 2.50 लाख रुपये प्रति एकड़ की आमदनी हो रही है। हरबाज के अनुसार सभी खर्च निकाल कर वह 1.25 लाख का मुनाफा ले रहा है। उनके अनुसार मछली पालन से होने वाली आमदनी रिवायती खेती की आमदनी की तुलना में दोगुनी है और वह अब इस धंधे को 10 से 15 एकड़ तक बढ़ाना चाहते हैं। हरबाज सिंह ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि मछली पालन के लिए बनाए तालाब का पानी वह सिंचाई के लिए इस्तेमाल करते हैं। इससे गेहूं की पैदावार पहले से ज्यादा हो गई है।
जिले में 1450 एकड़ जगह में किया जा रहा मछली पालन
मछली पालन विभाग के अधिकारियों ने किसानों से मछली पालन जैसे धंधे अपना कर ज्यादा मुनाफा कमाने की अपील करते हुए कहा कि गांवों के छप्पड़ों को पंचायत मनरेगा स्कीम के तहत सुधार करे, फिर इन्हें मछली पालन के लिए अपनाया जा सकता है। जिले में 1450 एकड़ जगह में मछली पालन किया जा रहा है। शिवालिक पहाड़ियों के बीच स्थित मिर्जापुर, सिसवां व जयंती और पड़छ डैम पांच साल के लिए मछली पालन विभाग द्वारा लीज पर दिए गए हैं। इससे सरकार को 58 लाख 52 हजार रुपये की आमदनी हुई है।