लालड़ू। शहर के नजदीकी गांव हुमायूंपुर और तसिंबली के सैकड़ों ग्रामीण संदिग्ध बुखार की चपेट में आ जाने से यहां दहशत का माहौल बना हुआ है। इन गांव के लोगों को अंदेशा है कि बीमार लोगों को डेंगू बुखार हो सकता है। इनमें से करीब 12 लोग सरकारी और निजी अस्पतालों में उपचाराधीन हैं। जबकि कई लोग पैसे की कमी के कारण घर पर ही इलाज करवा रह रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि गांव के बीमार लोगों का इलाज गांव में ही सरकारी की ओर से करवाया जाए।
गांव के पूर्व सरपंच निरमैल सिंह हुमायूंपुर, युवा नेता दलबीर सिंह, बलविंदर सिंह, दविंदर सिंह, इंद्रजीत शर्मा, कमलजीत सिंह पंच, नंबरदार साहिब सिंह, मेजर सिंह, लखवीर सिंह ने बताया कि हुमायूंपुर और तसिंबली की आबादी करीब 7 हजार है। दोनों गांवों के सैकड़ों लोग बुखार की चपेट में हैं। इनमें से 12 लोगों को डेंगू बुखार की पुष्टि हो चुकी है। उन्होंने बताया कि गांव हुमायूंपुर के रणदीप सिंह पुत्र वरिंदर कुमार के तीन वर्षीय बेटे की डेंगू बुखार के कारण मौत हो चुकी है। वहीं, जसविंदर कुमार की बेटी का डेंगू के कारण पीजीआई चंडीगढ़ में इलाज चल रहा है। इसके अलावा कमलदीप कौर पत्नी सुरिंदर सिंह अंबाला शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती है। दलबीर सिंह ने बताया कि उनके चाचा हरमीत सिंह और चाची चरणजीत कौर डेंगू की चपेट में आ गए हैं और मोहित के पिता सुरेन्द्र भी अस्पताल में उपचाराधीन हैं।
वहीं, ग्रामीणों ने बताया कि गांव के करीब 12 लोगों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है। जबकि कई मरीज अस्पताल का खर्चा नहीं उठा सकते हैं और वह घर पर ही दवा ले रहे हैं। उन्होंने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि गांव में डाक्टरों की टीम भेजकर लोगों के स्वास्थ्य की जांच की जाए और डेंगू से पीड़ित मरीजों का मुफ्त इलाज करवाया जाए।
गांव से लिए जा रहे सैंपल
सेहत विभाग की टीम के डॉक्टरों की ओर से गांव में जाकर डेंगू की जांच के लिए लोगों के सैंपल लिए जा रहे हैं। इन सैंपलों की जांच रिपोर्ट मंगलवार को आने के बाद जिनमें डेंगू की पुष्टि होगी उनका इलाज किया जाएगा। वहीं लोगों को डेंगू से बचने के उपाय बताए जा रहे हैं।
- संगीता जैन, एसएमओ, सिविल अस्पताल, डेराबस्सी।