स्वच्छता सर्वे में वीआईपी शहर पिछड़ा
रैंकिंग टॉप-100 तो दूर डेढ़ सौ से भी नीचे गिरी
पटियाला और बठिंडा शहरों से मिली करारी शिकस्त
गत वर्ष की रैकिंग से आई 44 अंकों की गिरावट
अमर उजाला ब्यूरो
मोहाली। स्वच्छ भारत सर्वे की रैंकिंग में वीआईपी शहर मोहाली को करारा झटका लगा है। मोहाली टॉप सौ में तो दूर टॉप डेढ़ सौ में भी अपनी जगह नहीं बना पाया है जबकि बठिंडा, पटियाला टॉप सौ में जगह बनाने में कामयाब रहे हैं। मोहाली को सर्वे में 153वीं रैंक मिली जोकि गत वर्ष की तुलना से 44 अंक नीचे हैं। जैसे ही स्वच्छ भारत सर्वे का रिजल्ट आया, उसके बाद नगर निगम के अधिकारियों में मंथन शुरू हो गया। हालांकि अधिकारी रैंकिंग गिरने की वजह सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट शुरू न होना मान रहे हैं।
स्वच्छता सर्वे 4 से 31 जनवरी तक चला था। इसके लिए नगर निगम की तरफ से पूरी तैयारियां की गई थीं। यहां तक अधिकारियों के दावे थे कि मोहाली टॉप सौ में अपनी जगह बनाएगा। हालांकि जब स्वच्छता सर्वेक्षण शुरू हुआ था, उसी समय अमर उजाला ने विभिन्न इलाकों में सफाई के खस्ता हालात व अन्य इंतजामों को लेकर बदइंतजामी का मुद्दा उठाया। इसके बाद नगर निगम की नींद खुली थी। हालांकि दिखावे के लिए थोड़ा-बहुत लीपापोती शहर में हुई थी। नगर निगम के अधिकारी हाउस की मीटिंग में पार्षदों को विश्वास दिला चुके थे कि इस बार सफाई का काम बढ़िया चल रहा है, लेकिन साथ ही शहर को करारा झटका लगा है। बुधवार को जैसे ही स्वच्छता अभियान की रैंकिंग जारी हुई तो अधिकारियों की मीटिंग हुई। साथ ही इसके कारणों पर मंथन हुआ। इस बारे मेें नगर निगम के असिस्टेंट कमिश्नर सरबजीत सिंह ने कहा कि रैंकिंग गिरने का सबसे बड़ा कारण समगौली में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट शुरू न होना है। अभी भी कंपनियां इस काम में रुचि नहीं दिखा रही हैं जिससे चलते प्रोजेक्ट लटक रहा है।
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गत साल शानदार रहा था रिकॉर्ड
गत वर्ष मोहाली का स्वच्छता सर्वेक्षण में प्रदर्शन शानदार रहा था। मोहाली की रैंकिंग 109 नंबर पर रही थी जोकि 2017 से 21 अंक अधिक थी। इस दौरान नगर निगम के मेयर ने दावा किया था कि मोहाली की रैंकिंग सुधारी जाएगी। मोहाली को टॉप के सुंदर शहरों में शामिल किया जाएगा।
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क्या कहते हैं लोग
कूड़े की सेग्रीगेशन पर देना होगा जोर
बीजेपी पार्षद अरुण शर्मा का कहना है कि पूरे शहर में सफाई का ठेका नगर निगम द्वारा 13 करोड़ का दिया हुआ है लेकिन कभी भी शहर में उचित तरीके से सफाई नहीं होती है। कूड़े की सेग्रीगेशन करने में छोटे-छोटे शहर मोहाली से आगे निकल गए हैं। ऐेसे में इस काम को गंभीरता से लेना चाहिए।
शिकायतों की नहीं हुई उचित सुनवाई
सोच सेवा समिति संस्था के मेंबर अतुल शर्मा का कहना है कि कई इलाकों में सफाई का बुरा हाल है। यहां तक मार्केटों से कूड़ेदान गायब हैं। लोग एप पर शिकायतें करते थे लेकिन उचित सुनवाई नहीं हुई। यह सारी कमी अधिकारियों की वजह से रही है और शहर को इसका नतीजा भुगतना पड़ रहा है।
अधिकारियों को नींद से जागना होगा
मोहाली विकास मंच के प्रधान विनीत वर्मा ने कहा कि मोहाली पढ़े-लिखों का शहर है। लोग लाखों रुपये प्रॉपर्टी टैक्स निगम को देते हैं। स्वच्छता सर्वेक्षण में निगम की पोल खुल गई है। अधिकारियों को सोचना होगा कि वह क्या कर रहे हैं। वर्ल्ड क्लास शहर से ऐसा खिलवाड़ नहीं होना चाहिए।
नोट : इन खबरों के लिए लगाएं ईपीएस
17 जनवरी 2018 को छपी खबर चलो लोग त सुट देणगे..पहला कूड़ेदान तो सही करो पेज चार पर छपी खबर का ईपीएस प्रयोग करे
इस तरह 28 जनवरी को छपी खबर हवो में दावे न करे... जमीन पर देखे शहर की गंदगी का हाल