शहर को तेज बारिश में जलभराव से बचाने के लिए पेक की टीम द्वारा तैयार की गई सर्वे रिपोर्ट सोमवार को निगम में पेश की गई। इसके मुताबिक जलभराव से निपटने के लिए 60 से अस्सी लाख रुपये की लागत आएगी। वहीं, पूरे शहर में 80 से 100 इंच की 26 किलोमीटर लंबी बिछानी पड़ेगी। वहीं, लाइन के मेन होल भी बढ़ेेंगे। यह काम एक बड़े चरण पर करना होगा। हालांकि, मीटिंग में मौजूद लोग बोले कि इस काम में लंबा समय लगेगा। दूसरी तरफ अप्रैल महीना शुरू हो गया है। ऐसे में जल्द बरसात का मौसम शुरू हो जाएगा। जिससे लोगों को परेशानी उठानी पड़ेगी। ऐसे कोई ऐसा विकल्प बताया जाए, जिससे स्थिति से निपटा जा सके।
जानकारी के मुताबिक, सोमवार दोपहर निगम अधिकारियों, पेक की टीम व विभिन्न इलाकों के लोगों की मीटिंग हुई। मीटिंग में पेक की टीम ने करीब दो महीने में तैयार की गई अपनी सर्वे रिपोर्ट पेश की। इसमें पेक के अधिकारियों ने बताया कि मौजूदा स्ट्रार्म वाटर लाइन छोटी है। इसके अलावा अन्य कई कारण हैं, जिससे जल भराव की समस्या आ रही है। वहीं, शहर के विभिन्न इलाकों के पानी को भी विभिन्न नदियों और चो में फेंकने का सुझाव दिया गया। मीटिंग में निगम कमिश्नर उमा शंकर गुप्ता, एक्सईएन हरप्रीत सिंह, बीजेपी पार्षद अशोक झा, अरुण शर्मा और लव कुमार मौजूद रहे।
ऐसे निकाला जाएगा शहर का पानी
1. फेज-1, 2, 6 रिहायशी व इंडस्ट्रियल एरिया 1, 2, 3 4, 5 का बरसाती पानी पटियाला की राव में छोड़ने के लिए कहा गया है।
2. फेज-2, 4,5 रिहायशी का पानी लखनौर चो में गिराने को कहा गया।
3. फेज-7, 8, 9 का पानी एन-चो में मिला जाएगा।
4. फेज-11 वाला पानी कंबाला के पास से जो चंडीगढ़ का नाला आ है उसमें गिराया जाएगा।
इस साल रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर निर्भर
मीटिंग में मौजूद लोगों ने कहा कि जो पेक की टीम ने सुझाव तैयार किए हैं। उस पर अमल होते हुए लंबा समय लगेगा। इस बार बरसातों में इनसे निजात मिलने की उम्मीद नहीं है। इस पर पेक की टीम ने फेज-पांच का दौरा किया। साथ ही रेन वाटर हार्वेस्टिंग लगाने का सुझाव दिया है।