विजिलेंस ब्यूरो ने फर्जी सर्टिफिकेट देकर 24 साल से चकबंदी विभाग में बतौर पटवारी भरती होने और प्रमोशन लेकर कानूनगो बने आरोपी को प्राथमिक जांच के बाद मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है।
आरोपी जीरा (फिरोजपुर) का रहने वाला है। उसने मिलते जुलते नाम के एक व्यक्ति के सर्टिफिकेट के जरिए हेराफेरी कर नौकरी ली थी।
विजिलेंस ब्यूरो के डीएसपी सुरिंदर कुमार ने बताया कि राज्य सरकार और विभाग के मुख्य डायरेक्टर सुरेश अरोड़ा ने रिश्वत लेने की घटनाओं को रोकने के लिए एक टोल फ्री नंबर शुरू किया था।
उन्होंने बताया कि जसकरनजीत सिंह गांव फेमीवाला जीरा (फिरोजपुर) ने विजिलेंस ब्यूरो के टोल फ्री नंबर पर 10 जुलाई 2013 को शिकायत दी थी कि सुखजिंदर सिंह पुत्र प्यारा सिंह गांव फेमीवाला जीरा (फिरोजपुर) फर्जी सर्टिफिकेट पर चकबंदी विभाग में नौकरी कर रहा है।
जांच करने पर पता चला कि सुखजिंदर सिंह ने दसवीं पास नहीं की है। वह सरकारी हाई स्कूल भोगपुर से पढ़े सुखविंदर सिंह पुत्र प्यारा सिंह के सर्टिफिकेट के जरिए 21 फरवरी 1990 बतौर पटवारी भरती हो गया था।
कुछ समय पहले प्रमोशन के बाद उसे चकबंदी विभाग मोगा में तैनात कर दिया गया। उन्होंने बताया कि नौकरी देने वाले विभाग के अधिकारियों ने भी सर्टिफिकेट की ठीक तरह से पड़ताल नहीं की।
जांच में जन्मतिथि में भी फेरबदल
प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई कि उसके 9वीं कक्षा तक के स्कूल रिकार्ड में आरोपी का नाम सुखजिंदर सिंह और जन्मतिथि चार जून 1964 दर्ज है।
जबकि नौकरी के लिए दिए गए सर्टिफिकेट में जन्म तारीख एक फरवरी 1966 है। विजिलेंस की जांच के मुताबिक आरोपी ने तीन मई 2006 को अपना ड्राइविंग लाइसेंस भी सुखविंदर सिंह के नाम पर जारी करवाया है।