गांव घरांगणा के एक भट्ठे में बंधक बनाकर रखे गए 33 मजदूरों को दलित विरोधी आंदोलन ने मुक्त करवाकर उनके बयान नायब तहसीलदार मानसा के सामने दर्ज करवाए। भट्ठा मालिक कोई भी रिकार्ड पेश नहीं कर पाया। उन्हें सोमवार तक का समय दिया गया है।
दलित विरोधी आंदोलन के नेताओं ने बताया कि नंदी बीकेओ गांव घरागणा में 11 अक्तूबर 2013 को यूपी से 33 मजदूरों को काम के लिए लाया गया था। भट्ठा मालिक की तरफ से उन्हें रहने के लिए कोई जगह नहीं दी गई और ना ही कोई पगार दी गई।
उन्होंने कहा कि एक मजदूर माही लाल ने अपनी लड़की की शादी के लिए छुट्टी मांगी लेकिन भट्ठा मालिक ने 15 जून तक किसी को भी जाने की इजाजत नहीं दी। बंधक बनाए गए मजदूरों में छोटे बच्चे भी शामिल थे।
उन्होंने बताया कि घटना का पता चलते ही दलित विरोधी आंदोलन के नेताओं ने नायब तहसीलदार राजेश कुमार व लेबर इंस्पेक्टर निरंजन सिंह को मामले से अवगत कराया। सभी वहां पहुंचे और मजदूरों को रिहा करवाया।
इसके बाद नायब तहसीलदार के समक्ष बयान दर्ज करवाए गए। उन्होंने बताया कि प्रशासन की तरफ से भट्ठा मालिक से रिकार्ड भी मंगवाया गया लेकिन कोई रिकार्ड पेश नहीं किया गया। अब उसे सोमवार तक का समय दिया गया है।
उन्होंने मांग की कि भट्ठा मालिक के खिलाफ सख्त कार्रवाई करके मजदूरों को उनका बनता मेहनताना दिलाया जाए। उधर दूसरी तरफ भट्ठा मालिक ने सभी आरोपों को नकारते हुए कहा कि सभी मजदूरों को मजदूरी पहले ही दे दी गई है। उनके पास सारा रिकार्ड मौजूद है।