जिस शव को पुलिस ने अज्ञात समझकर सिविल अस्पताल में रखवाया था, वह उनके ही पूर्व डीएसपी का निकला। शव की शिनाख्त वाट्सऐप के जरिए हो पाई। रिटायर्ड डीएसपी के बेटे पंजाब पुलिस में तैनात कांस्टेबल ने वाट्सऐप पर फोटो देखकर अपने पिता का शव पहचाना और पुलिस से संपर्क किया। मृतक की पहचान सलेम टाबरी निवासी रिटायर्ड डीएसपी शमशेर सिंह (72) के रुप में हुई है। थाना मुल्लांपुर की पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद शव वारिसों के हवाले कर दिया।
जानकारी के अनुसार 12 दिसंबर को बदोवाल रोड पर सड़क हादसे में एक व्यक्ति घायल हो गया। एंबुलेंस 108 ने घायल व्यक्ति को सिविल अस्पताल पहुंचाया। हादसे में घायल की दाएं टांग की हड्डी टूट गई थी। कुछ होश में आने पर घायल ने डॉक्टरों को अपना नाम शमशेर सिंह बताय, लेकिन वह पता नहीं बता पाया। डॉक्टरों ने 24 दिसंबर को टांग का आपरेशन करना था, मगर 23 दिसंबर को ही इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
शव मोर्चरी में रखवाकर डॉक्टरों ने थाना सदर को सूचना दी। थाना सदर पुलिस ने लिख कर भेज दिया कि मामला थाना मुल्लांपुर का है। इस पर डॉक्टरों ने मुल्लांपुर थाने को इसकी सूचना दी। एएसआई तरसेम लाल ने बताया कि पुलिस ने शव अज्ञात समझ कर 72 घंटे के लिए सिविल अस्पताल के शव गृह में रखवा दिया। पुलिस ने मृतक के परिजनों की तलाश के लिए सोशल मीडिया की मदद ली और वाट्सऐप पर मृतक का फोटो अपलोड कर कई लोगों को भेजा। फोटो
पंजाब पुलिस में कांस्टेबल जसपाल सिंह के पास पहुंचा तो उसने पिता को पहचान लिया। जसपाल सिंह का कहना है कि उसके पिता शमशेर सिंह पंजाब पुलिस में डीएसपी थे। 2002 में उन्होंने समय से दो साल पहले रिटायरमेंट ले ली थी। जसपाल ने बताया कि वह पटियाला में रहता है, वहां एक मंत्री के साथ गनमैन है। उसके पिता सलेम टाबरी जवंद विहार के घर में अकेले रहते थे। पटियाला में उनकी बुआ भी रहती है।
कुछ दिनों के लिए पिता, बुआ के पास गए थे। नौ दिसंबर को बुआ ने उन्हें वापस सलेम टाबरी घर छोड़ दिया था। 12 दिसंबर के बाद से वह लापता थे। जसपाल का कहना है कि उसके पिता की दिमागी हालत काफी समय से ठीक नहीं थी। वह कभी-कभी रिश्तेदारों के यहां चले जाते थे। उन्हें यही लगा कि वह किसी रिश्तेदार के पास गए होंगे। जब उन्होंने वाट्सऐप पर फोटो देखी तो वह तुरंत पुलिस के पास पहुंचे।